अन्ना के अनशन से बढ़ा दबाव

अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट AP

लोकपाल विधेयक के मसले पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे लगातार दूसरे दिन जंतर मंतर पर अनशन पर बैठे हुए हैं और केंद्रीय क़ानून मंत्री ने कहा है कि वो विधेयक पर और चर्चा के लिए तैयार हैं.

अन्ना हज़ारे को इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है. सरकार ने अन्ना के अनशन पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि हज़ारे के अनशन के कारण सरकार पर काफ़ी दबाव है.

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वो विधेयक पर और चर्चा के लिए न केवल तैयार हैं बल्कि वो चाहते हैं कि ये बिल जल्दी से जल्दी संसद में आए और पारित हो.

उनका कहना था, ''प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पूरा संघर्ष कर रहे हैं. हम इस विधेयक पर सुझावों के लिए पूर्ण रुप से तैयार है.हम चाहते हैं कि ये विधेयक संसद में जल्दी पारित हो.''

पवार की पेशकश

इस बीच कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि वह लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए बनाए गए मंत्रियों के समूह ( जीओएम ) से हटने को तैयार हैं. पवार ने कहा कि जीओएम से बाहर होने पर उन्हें खुशी होगी. गौरतलब है कि जन लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वालों में से एक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का मसौदा तैयार करने वालों में शरद पवार जैसे लोग के होने से इसकी प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी.

लेकिन शरद पवार के जीओएम से हटने के प्रस्ताव पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ पवार मुद्दा नहीं है और जीओएम में दूसरे भी मंत्री हैं

उधर कई केंद्रीय मंत्रियों ने बयान दिया है और कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने भी कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गंभीर है और विधेयक पर सुझावों के लिए भी तैयार है.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है जिस पर अन्ना हज़ारे ने बीजेपी की आलोचना की है और कहा है कि उन्हें न तो सरकार पर भरोसा है और न ही विपक्षी दलों पर.

उल्लेखनीय है कि सरकार की तरफ से लोकपाल विधेयक का एक मसौदा है जबकि अन्ना हज़ारे और ऐसे ही कई अन्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर लोकपाल का मसौदा तैयार किया है जिसे जन लोकपाल विधेयक का नाम दिया गया है.

जनता का समर्थन

अन्ना हज़ारे को कई हलकों से समर्थन मिल रहा है लेकिन जनता भी उनके समर्थन में दिखाई दे रही है.

हज़ारे का कहना था कि सरकार ने 42 सालों से लोकपाल विधेयक को संसद में लटका रखा है और इसे पारित नहीं करना चाहती है.

अन्ना ने सरकारी मसौदे को भी ख़ारिज़ कर दिया है और उनका कहना है कि सरकार जन लोकपाल विधेयक को मंजूरी दे क्योंकि यह लोगों की आवाज़ है.

हज़ारे ने इस मामले पर प्रधानमंत्री को और सोनिया गांधी को भी चिट्ठी लिखी है लेकिन हज़ारे के अनुसार उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है.

सरकार का कहना है कि उन्होंने हज़ारे से बात की थी और पूरे मामले में ऐसी समिति बनाने का प्रस्ताव रखा था जिसमें नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले लोग भी हों लेकिन अन्ना इस पर राज़ी नहीं हुए.

अन्ना का अनशन लगातार दूसरे दिन जारी है और लगता नहीं है कि वो इस बार मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई के बिना अनशन तोड़ने वाले हैं.

संबंधित समाचार