अनशन का तीसरा दिन, व्यापक समर्थन

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अन्ना हज़ारे का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी है. गुरुवार की सुबह उन्होंने वहाँ उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.

धीरे-धीरे उनको मिलने वाला समर्थन बढ़ रहा है.

एक ओर उनके साथ आमरण अनशन करने वालों की संख्या दो सौ से अधिक हो चुकी है दूसरी ओर बंगलौर, जयपुर, चंडीगढ़, लखनऊ, पुणे और मुंबई सहित देश के कई शहरों में उनके समर्थन में प्रदर्शन हुए हैं और समाज के अलग-अलग वर्गों से समर्थन के बयान आ रहे हैं.

इंटरनेट पर ट्विटर और फ़ेसबुक सहित कई सोशल नेटवर्क पर भी अन्ना हज़ारे के आंदोलन को मिल रहा समर्थन व्यापक रुप लेता जा रहा है.

आमिर ख़ान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अन्ना हज़ारे की मांगों पर ग़ौर करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा कई और फ़िल्मी कलाकारों ने इस आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है.

कुछ राजनीतिक नेताओं ने अन्ना हज़ारे के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश की लेकिन वहाँ बैठे कार्यकर्ताओं ने उनका ज़ोरदार विरोध किया और वापस लौटने पर मजबूर कर दिया.

इस बीच आंदोलन का असर दिखना शुरु हो गया है और इसकी शुरुआत मंत्रिमंडल समूह से शरद पवार के इस्तीफ़े से हुई है.

तीसरा दिन

अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित लोकपाल विधेयक में परिवर्तन की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकारी विधेयक में व्यापक बदलाव के सुझाव दिए हैं और एक वैकल्पिक विधेयक का मसौदा पेश किया है जिसे जन-लोकपाल विधेयक का नाम दिया गया है.

जन-लोकपाल विधेयक को लागू करने की मांग को लेकर पाँच अप्रैल से वे दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं.

महात्मा गांधी की समाधि राजघाट से एक रैली निकालकर वे जंतर मंतर पहुँचे. उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल और संदीप पांडे सहित सैकड़ों लोग थे.

जंतर मंतर में धरना स्थल पर अन्ना हज़ारे और उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जाँच की जा रही है.

बुधवार को अन्ना हज़ारे ने यूपीए की चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी आड़े हाथों लिया.

सरकार की ओर से क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने बयान दिया है कि सरकार इस पर चर्चा करने को तैयार है.

ख़बरें हैं कि बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी अन्ना हज़ारे के आंदोलन पर चर्चा हुई.

नेताओं को लौटाया

बुधवार को कम से कम चार राजनीतिक नेताओं ने जंतर मंतर पहुँचकर अन्ना हज़ारे के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश की लेकिन वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनके ख़िलाफ़ ज़ोरदार नारेबाज़ी करते हुए सभी को वापस लौटने को मजबूर कर दिया.

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वे नारे लगा रहे थे, "नेतागिरी नहीं चलेगी".

सबसे पहले वहाँ दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मदन लाल खुराना पहुँचे थे. इसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहन सिंह.

इन दोनों के लौटने के बाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के नेता ओमप्रकाश चौटाला वहाँ पहुँचे लेकिन कार्यकर्ताओं ने उन्हें मंच तक जाने ही नहीं दिया गया.

मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व भाजपा नेता उमा भारती को भी भीड़ की नाराज़गी के बीच वापस लौटना पड़ा.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अन्ना हज़ारे के आंदोलन में किसी राजनीतिक दल को शामिल नहीं करना चाहते.

उनका कहना है कि पिछले 43 वर्षों में हर राजनीतिक दल को मौक़ा मिला लेकिन किसी ने भी लोकपाल विधेयक को पारित नहीं करवाया.

इस बीच अन्ना हज़ारे ने प्रधानमंत्री को एक कड़ा पत्र लिखा है और कांग्रेस नेताओं के इस बयान का प्रतिरोध किया है कि वे विपक्षी दलों, ख़ासकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर ये आंदोलन कर रहे हैं.

आमिर का पत्र

आमिर ख़ान ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक ख़त लिखकर उनसे अन्ना हज़ारे की मांगों पर ग़ौर करने का अनुरोध किया.

आमिर ने अपने पत्र में लिखा है कि वो पिछले कुछ दिनों से अन्ना हज़ारे के आमरण अनशन पर बैठने के बारे में मीडिया में आ रही खबरों पर नज़र रखे हुए हैं और इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आख़िर वो किस चिज़ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.

आमिर ने ख़त में लिखा, ''मैंने सरकार के लोकपाल विधेयक के मसौदे और सामाजिक कार्यकर्ताओं के ज़रिए तैयार किए गए जन लोकपाल विधेयक के मसौदे दोनों का अध्य्यन किया है. मैं विनम्रतापूर्वक आप से कहना चाहूंगा कि मैंने इस सिलसिल में जो भी पढ़ा है उनके आधार पर कह सकता हूं कि हज़ारे जो कुछ भी कह रहे हैं मुझे वो बातें सही लगती हैं.''

आमिर ने ख़ुद को देश के एक अरब से अधिक लोगों में शामिल करते हुए कहा कि वह भी औरों की तरह भ्रष्टाचार को लेकर चिंतित हैं.उन्होनें उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार व्यक्ति समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए सख़्त क़दम उठाएंगे.

पवार का इस्तीफ़ा

इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने भ्रष्टाचार से निपटने के उपाय सुझाने के लिए बने मंत्रिमंडलीय समूह से इस्तीफ़ा दे दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शरद पवार ने प्रधानमंत्री को ख़त लिखकर उन्हें अपने फ़ैसले की सूचना दे दी है.

पवार ने कहा, ''मैंने भ्रष्टाचार पर मंत्रिमंडलीय समूह से हटने के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. मैंने उन्हें सूचित किया है कि मैं समूह के साथ आगे नहीं बने रहना चाहता. मेरी तरफ़ से यह अध्याय अब समाप्त समझा जाए.''

अन्ना हज़ारे को इस बात पर सख़्त आपत्ति थी कि भ्रष्टाचार पर विचार कर रही समिति का नेतृत्व शरद पवार करें. वे पहले भी शरद पवार के ख़िलाफ़ बयान देते रहे हैं.

बुधवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने बेग़ैर किसी मंत्री का नाम लेते हुए लिखा था, ''आप(प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह) कहते हैं कि मंत्रियों का समूह भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून का मसौदा तैयार कर रहा है. लेकिन मंत्री समूह में शामिल कई मंत्रियों का अतीत इतना संदिग्ध है कि अगर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कोई प्रभावी सिस्टम होता तो उनमें से कुछ मंत्री सलाखों के पीछे होते.''

मंत्रिमंडलीय समूह से पवार के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा, "वो मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे देते?"

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