सत्ताइस साल बाद वतन वापसी

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क़रीब 27 साल से पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक गोपाल दास आख़िरकार अपने वतन लौट आए हैं. वाघा में भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद गोपाल दास ने ज़मीन चूमकर अपने देश का नमन किया.

उनके बड़े भाई और बहन उन्हें लेने वहाँ पहुँचे हुए थे. गोपाल दास भारत में आने के बाद काफ़ी भावुक हो गए और रोने लगे. भारतीय सुप्रीम कोर्ट की अपील पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने मानवीय आधार पर गोपाल दास की सज़ा माफ़ कर दी थी.

अटारी में गोपाल दास के परिजनों के अलावा उनके गाँव के कई लोग भी मौजूद थे. गोपाल दास पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के भैनी मियाँ ख़ान गाँव के रहने वाले हैं.

वर्ष 1984 में गोपाल दास अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे, जहाँ पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया. उन पर जासूसी का आरोप लगा और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा दी गई.

नाराज़गी

रिहा होने के बाद भारत पहुँचे गोपाल दास भारत सरकार से काफ़ी नाराज़ नज़र आए. पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार उनके मामले में 27 साल तक क्यों सोई रही.

गोपाल दास ने कहा, "भारतीय नेतृत्व से मुझे इसलिए शिकायत है क्योंकि कई वर्षों से बड़ी संख्या में भारतीय क़ैदी पाकिस्तानी जेलों में सड़ रहे हैं और सरकार उनकी सुधि तक नहीं लेती."

उन्होंने बताया कि 32 भारतीय नागरिक जेल की सज़ा काट चुके हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से पहल न होने के कारण अब भी जेलों में बंद हैं.

गोपाल दास ने दावा किया कि ख़राब स्वास्थ्य के कारण क़रीब सात भारतीय क़ैदियों की मौत हो गई है जबकि कई लोगों का दिमाग़ी संतुलन बिगड़ गया है.

पिछले दिनों 30 मार्च को मोहाली में विश्व कप के सेमी फ़ाइनल मैच के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात हुई थी.

इसी के ठीक पहले पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने गोपाल दास की सज़ा माफ़ करने की घोषणा की थी. गोपाल दास ने अपनी रिहाई के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया.

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