मोदी को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति केस सीबीआई के हवाले किया

नरेंद्र मोदी, अमित शाह
Image caption मोदी और अमित शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं.

एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तुलसी प्रजापति की हत्या की जांच केंद्रीय जांच व्यूरो यानि सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं.सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार और ख़ासकर पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह के लिए एक बड़ा झटका है.

प्रजापति सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में एकमात्र गवाह था जिसकी 2006 में हत्या कर दी गई थी.

शुक्रवार को न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति बी एस चौहान की पीठ ने गुजरात सरकार की इस याचिका को ख़ारिज कर दिया कि इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता क्योंकि प्रदेश पुलिस इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दायर कर चुकी है.

'चश्मदीद'

इस बारे में प्रजापति की मां नर्मदा बाई ने अपील दायर की थी. अपील में आरोप लगाया गया था कि गुजरात पुलिस ने प्रजापति को कथित तौर पर एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया था क्योंकि वह सोहराबुद्दीन शेख़ और उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या का चश्मदीद था.

सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी को नवंबर 2005 में गुजरात पुलिस ने एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस को सीबीआई को दिए जाने के लिए याचिकाकर्ता ने बहुत मज़बूती से अपना पक्ष रखा क्योंकि इस मामले में तीन प्रदेशों, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात की पुलिस के शामिल होने का शक है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की भी जमकर आलोचनी की कि गुजरात पुलिस इस हत्याकांड की जांच बहुत धीमी गति से कर रही है. एक ऐसा केस जिसमें कुछ शक्तिशाली राजनेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम भी शक के घेरे में हैं.

Image caption सोहराबुद्दीन शेख़ को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में गुजरात पुलिस ने मार दिया था.

पीठ ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि गुजरात पुलिस ने हत्या के बाद आरोपपत्र दायर करने में साढ़े तीन साल से भी ज़्यादा का वक्त लिया.

अदालत में गुजरात सरकार के वकील की दलील थी कि प्रजापति की हत्या एक अलग मुठभेड़ का मामला है और यह किसी भी तरह सोहराबुद्दीन शेख़ मुठभेड़ मामले से जुड़ा हुआ नहीं है.

सीबीआई , गुजरात सरकार, अमित शाह और नर्मदा बाई के वकीलों की तीन दिनों तक दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 मार्च को इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

गुजरात सरकार और अमित शाह के वकीलों ने इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने का इस आधार पर विरोध किया था कि केंद्र सरकार इस मामले में पूर्व मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने की कोशिश कर रही है.

लेकिन सीबीआई के वकील केटीएस तुलसी और नर्मदा बाई के वकील हुज़ैफ़ा अहमदी ने इस मामले को सीबीआई के हवाले किए जाने की अपनी मांग को जायज़ ठहराते हुए कहा कि अब तक गुजरात पुलिस की जांच ‘पक्षपातपूर्ण’ रही है और प्रजापति की हत्या सोहराबुद्दीन शेख़ और उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या से जुड़ा मामला है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अपनी जांच पूरी करने के लिए छह महीने का वक़्त दिया है. अदालत ने गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान सरकार को जांच में सीबीआई को हर तरह का सहयोग देने का भी निर्दश दिया.

'एक और झटका'

मोदी सरकार को एक और झटका मिला गुजरात उच्च न्यायालय से. शुक्रवार को गुजरात उच्च न्यायालय ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल यानि एसआईटी को ख़ुब खरी खोटी सुनाई. अदालत ने कहा कि एसआईटी को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए कि अदालत ईशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने पर मजबूर हो जाए.

अदालत ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वो जांच में जानबूझकर अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रही है.

जावेद शेख़ और उसकी मित्र इशरत जहां समेत चार लोगों को अहमदाबाद के क्राइम ब्रांच ने जून 2004 में मुठभेड़ में मार गिराया था और कहा था कि वे लोग चरमपंथी संगठन लश्कर-तैय्यबा के सदस्य थे जो मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने आए थे. लेकिन इशरत जहां के घरवाले ने गुजरात पुलिस की इस दलील को ख़ारिज करते हुए गुजरात हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. अदालत के आदेश पर विशेष जांच दल इसकी तफ़्तीश कर रही है.

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