मौलाना की मौत के बाद घाटी में बंद

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Image caption श्रीनगर में धमाके के बाद लाल चौक पर पुलिस ने घेराबंदी की.

भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को धार्मिक नेता मौलाना शौकत अहमद शाह बम धमाके में मौत के बाद शनिवार को कश्मीर घाटी में शनिवार से दो दिन का बंद शुरू हो गया है.

मौलाना शौकत श्रीनगर की एक मस्जिद के बाहर हुए धमाके में मारे गए थे.

अलगाववादी हुर्रियत कांफ़्रेंस के दोनों धड़ों ने मौलाना की हत्या की कड़ी आलोचना करते हुए घाटी में शनिवार को बंद का आहवान किया है.

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट यानि जेकेएलएफ़ ने रविवार को हड़ताल की अपील की है. जेकेएलएफ़ के नेता यासिन मलिक मौलाना शौकत के करीबी माने जाते थे.

शनिवार सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मौलाना शौकत के घर गए. उन्होंने पुलिस प्रमुख को घटना की जांच के आदेश भी दिए.

बंद का असर

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Image caption मौलाना शौकत को अंतिम विदाई देने के लिए हज़ारों लोग जमा हुए.

हड़ताल की वजह से घाटी में व्यापारिक और शैक्षिक संस्थाओं में काम ठप पड़ गया है.

हालांकि मौलाना की मौत के बाद कहीं से भी पत्थरबाज़ी की किसी घटना की ख़बर नहीं आई है लेकिन संवेदनशील इलाक़ो सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.

श्रीनगर के लाल चौक पर जनाज़े की नमाज़ में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में स्थित चरमपंथी गुटों ने मौलाना शौकत की मौत का इल्ज़ाम 'भारतीय एजेंसियों' पर लगाया है.

मौलाना शौकत अहमद शाह

मौलाना शौकत शुरू में शॉल निर्यातक थे लेकिन बाद में उन्होंने धार्मिक कार्यों के लिए ये व्यवसाय छोड़ दिया था.

उसके बाद वे जमिअत अहले हदीस के साथ जुड़ गए. वर्ष 2004 में वे इस संस्था के अध्यक्ष बने.

उनकी अध्यक्षता में अहले हदीस के सदस्यों की संख्या दस लाख से ऊपर पहुंच गई. ये संस्था कश्मीर घाटी में आठ सौ से अधिक मस्जिदों का प्रबंधन करती है.

शुक्रवार से पहले भी उनपर दो बार जानलेवा हमले हुए थे जिसके बाद उन्हें सुरक्षा गार्ड मुहैया करवाए गए थे.

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