बिनायक:ज़मानत याचिका पर सुनवाई टली

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सुप्रीम कोर्ट में बिनायक सेन की ज़मानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टल गई है. सोमवार को सुनवाई होनी थी लेकिन सरकारी वकीलों ने और वक़्त माँगा है.

पिछले 24 दिसंबर को रायपुर की एक निचली अदालत ने बिनायक सेन और उनके साथ दो अन्य लोगों को राज द्रोह का दोषी पाते हुए उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी.

सज़ा के निलंबन और ज़मानत के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की गई थी. लेकिन इस साल फ़रवरी में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिनायक सेन की ज़मानत याचिका ठुकरा दी थी. इस फ़ैसले को चुनौती देते हुए बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.

बिनायक सेन के साथ दो और लोगों को यही सज़ा सुनाई गई थी. इनमें से एक नारायण सान्याल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं और दूसरे पीयूष गुहा कोलकाता के व्यापारी हैं.

व्यवसायी पीयूष गुहा की भी ज़मानत अर्ज़ी नामंज़ूर हो गई थी.दुनिया भर के 40 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन के रिहाई की अपील की है.

बिनायक सेन को मई, 2007 में बिलासपुर से गिरफ़्तार किया गया था. वे दो वर्षों तक जेल में रहे और आख़िर मई, 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें ज़मानत मिल सकी थी. लेकिन पिछले साल कोर्ट द्वारा राज द्रोह का दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें फिर जेल में डाल दिया गया था.

बिनायक सेन छत्तीसगढ़ सरकार के आरोपों का खंडन करते रहे हैं और कहते रहे हैं कि वो नक्सलियों का साथ नहीं देते लेकिन वो साथ ही राज्य सरकार की ज्यादतियों का भी विरोध करते रहे हैं.

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