मनमोहन सिंह पर असांज के गंभीर आरोप

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Image caption मनमोहन सिंह सरकार को भ्रष्टाचार के कई मामलों से जूझना पड़ रहा है

विकिलीक्स के संपादक जूलियन असांज ने एक भारतीय अख़बार को दिए साक्षात्कार में कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व्यक्तिगत तौर पर भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन संकेत यही मिलते हैं कि उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों को छिपाने की आदत है.

गोपनीय जानकारियों को सार्वजनिक करने का अभियान चलाने वाली वेबसाइट विकिलीक्स के संपादक जूलियन असांज ने एक घंटे तक चले इंटरव्यू में भारत और विश्व राजनीति, पत्रकारिता, विकिलीक्स के काम करने के तौर तरीक़े और वेबसाइट के उद्देश्य जैसे ढेर सारे मुद्दों पर काफ़ी लंबी बातचीत की.

साक्षात्कार के दौरान असांज ने मनमोहन सिंह पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि, ''मेरा ख़्याल है कि मनमोहन सिंह को भ्रष्टाचार के आरोपों को छिपाने की आदत है.''

हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े जो मामले भी सामने आए हैं सरकार ने उनके ख़िलाफ़ फ़ौरन कार्रवाई की है.

'भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हैं'

भारत से छपने वाले एक प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक 'द हिंदू' के संपादक एन राम को दिए एक इंटरव्यू में असांज ने ये बातें कहीं है.

अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़ एन राम ने शुक्रवार यानि आठ अप्रैल को ब्रिटेन के एक शहर में जाकर जूलियन असांज से बातचीत की थी.

असांज इन दिनों अपने एक दोस्त वॉन स्मिथ के यहां रह रहे हैं.

मनमोहन सिंह के बारे में असांज ने कहा,'' मैंने पढ़ा तो है लेकिन मेरे पास इसका कोई सबूत नहीं है कि इस बारे में सभी एक मत हैं कि मनमोहन सिंह निजी तौर पर भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन ये तो दूसरे लोगों के भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है.''

कांग्रेस ने इन आरोपों को असांज की निजी राय बताते हुए उन्हें मानने से इनकार कर दिया है.

कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी और यूपीए सरकार दोनों भ्रष्टाचार के सख़्त ख़िलाफ़ है और भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में सरकार ने फ़ौरन कार्रवाई की है.

शकील अहमद ने कहा, ''जो भी भ्रष्टाचार के मामले हुए हैं उनमें सरकार ने कार्रवाई की है. ये कोई अच्छी बात नहीं है लेकिन ये सच्चाई है कि भारत के इतिहास मे पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार में शामिल किसी केंद्रीय मंत्री को गिरफ़्तार किया गया है."

उन्होंने कहा, "शुरू में ही जब ये मामला सामने आया था तो प्रधानमंत्री ने कहा था कि जो भी दोषी होगा चाहे वो जितने बड़े पद पर हो उसे बख़्शा नहीं जाएगा.''

शकील अहमद ने एक बार फिर दोहराया कि विकिलीक्स ख़ुलासे पर उनकी पार्टी की राय यही है कि उन दस्तावेंज़ों को सत्यापित नहीं किया जा सकता.

'गुमराह करने का प्रयास'

मनमोहन सिंह के ज़रिए भारत से संबंधित विकिलीक्स दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता पर शक किए जाने पर असांज काफ़ी दुखी नज़र आए.

इन दस्तावेज़ों के सामने आने के बाद मनमोहन सिंह ने संसद में बयान दिया था कि सरकार इन दस्तावेज़ों की सच्चाई, विषय-वस्तु और यहां तक कि उनके होने की भी पुष्टि नहीं कर सकती.

इस पर असांज ने कुछ सख़्त शब्दों का इस्तेमाल किया.

असांज ने कहा कि, ''इस तरह की प्रतिक्रिया ने मुझे काफ़ी परेशान किया, क्योंकि हिलेरी क्लिंटन ने भारत सरकार को दिसंबर मे ही जानकारी दे दी थी कि इस तरह के दस्तावेज़ आने वाले हैं. पिछले चार सालों में हमने जो भी दस्तावेज़ प्रकाशित किए हैं उनकी विश्वसनीयता पर आज तक किसी ने सवाल नहीं उठाए हैं."

असांज ने कहा, '' मुझे लगता है कि मनमोहन सिंह का इस तरह का बयान भारत के लोगों को जानबूझकर गुमराह करने की कोशिश है''.

असांज के अनुसार मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर कहना चाहिए था कि जो आरोप लगें हैं वो बहुत गंभीर हैं, सरकार मामले की पूरी जांच करेगी और संसद में रिपोर्ट पेश करेगी. अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो ज़्यादा बेहतर होता. इसतरह से तो उन्होंने अपने और अपनी पार्टी के हितों के ख़िलाफ़ काम किया.

'विकीलीक्स का असर'

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Image caption अन्ना हज़ारे के अनशन को असांज ने विकिलीक्स के दस्तावेज़ों का असर बताया है

भारते के बारे में बातचीत करते हुए असांज ने कहा कि भारत में भयंकर भ्रष्टाचार है और इसके बारे में ज़रूर कुछ किया जाना चाहिए. इसी क्रम में उन्होंने अन्ना हज़ारे समेत भारत में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ रहे कई लोगों के बारे में बहुत अच्छी बातें कहीं.

असांज के मुताबिक़, ''व्यक्ति विशेष के ज़रिए उठाए गए साहसी क़दमों से आम लोगों में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने की इच्छाशक्ति पैदा होगी.''

एक ही दिन पहले जूलियन असांज ने कहा था कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सामाजसेवी अन्ना हज़ारे का आंदोलन विकिलीक्स के दस्तावेज़ों से प्रेरित था.

अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सख़्त क़ानून बनाने के लिए जन लोकपाल बिल लाने की मांग को लेकर दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे थे.

चार दिनों के अनशन के बाद भारत सरकार ने अन्ना हज़ारे की बातें मान ली थी.

असांज ने कहा था,''2008 में विश्वास प्रस्ताव के दौरान कैश फ़ॉर वोट से लेकर गृहमंत्री पी चिदंबरम के बयान तक भारतीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दों को विकिलीक्स सामने लाया है. अन्ना हज़ारे का आंदोलन इन दस्तावेज़ों के प्रभाव की एक मिसाल है.''

अभी इस पर दूसरी राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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