'इतने सालों में क्यों नहीं की अपील?'

Image caption 26 साल पहले 2/3 दिसंबर, 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस के कारण हज़ारों लोग मारे गए थे और अनेक लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा है कि भोपाल गैस त्रासदी मामले में सुधारात्मक याचिका पहले क्यों नहीं दायर की गई.

इस याचिका में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से 1996 के कोर्ट के ही एक फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है.

सितंबर 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी मामले में अभियुक्तों के खिलाफ लगाई गई 'ग़ैर इरादतन हत्या' की कड़ी धारा को बदलकर "लापरवाही से मौत' की धारा कर दिया था.

इसी धारा के तहत मामले की पूरी सुनवाई हुई और पिछले साल भोपाल की एक निचली अदालत ने सात अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए दो साल की सज़ा सुनाई.

'ग़ैर इरादतन हत्या' की धारा के तहत दोषी पाए जाने पर ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल की सज़ा का प्रावधान है जबकि 'लापरवाही से मौत' की धारा के तहत दो साल से ज़्यादा सज़ा नहीं दी जा सकती.

अब सीबीआई ने 1996 के फैसले के खिलाफ सुधारात्मक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से सातों अभियुक्तों की सज़ा पर पुनर्विचार करने और उसे आईपीसी की धारा 304 के दूसरे भाग ('ग़ैर इरादतन हत्या') में बदलने की दरख्वास्त की है.

मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाड़िया की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ इस सुधारात्मक याचिका की सुनवाई कर रही है.

आज इस पीठ ने सीबीआई से पूछा कि सीबीआई ने ये दरख्वास्त पिछले 15 सालों में क्यों नहीं की.

सीबीआई की दरख्वास्त

सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे एटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा, "मुझे नहीं मालूम कि सीबीआई ने ऐसा क्यों नहीं किया, लेकिन एक व्यक्ति ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जो खारिज हो गई."

सीबीआई ने पिछले साल 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में ये सुधारात्मक याचिका दाखिल की थी.

जिन सात अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ये केस दोबारा खोला गया है वो हैं यूनियन कार्बाइड इंडिया के पूर्वाध्यक्ष केशब महिंद्रा, यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के पूर्व प्रबंधन निदेशक विजय गोखले, पूर्व उपाध्यक्ष किशोर कामदार, पूर्व वर्क मैनेजर जे एम मुकुंद, पूर्व प्रोडक्शन मैनेजर एस पी चौधरी, पूर्व प्लांट सुपरिंटेंडेंट के वी शेट्टी और पूर्व प्रोडक्शन एसिस्टेंट एस आई क़ुरैशी.

सीबीआई की याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी अभियुक्तों को नोटिस जारी कर दिया था.

इस मामले की अगली सुनवाई 19 अप्रैल को तय की गई है.

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