इतिहास के पन्नों से

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Image caption इस एक घटना ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन पर शायद सबसे ज़्यादा प्रभाव डाला था.

आज के दिन यानि 13 अप्रैल को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जु़ड़ी एक प्रमुख घटना जलियांवाला बाग़ कांड हुआ था.

जलियांवाला बाग़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास एक छोटा सा बागीचा है जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनेल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फ़ौज ने गोलियां चला के सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था.

यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यही थी.

उस दिन जलियांवाला बाग़ में एक सभा रखी गई थी जिसमें कुछ नेता रोलेट एक्ट के ख़िलाफ़ भाषण देने वाले थे.

जब नेता भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजिनेल्ड डायर ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुँच गए और बिना कोई चेतावनी दिए फायरिंग के आदेश दे दिए.

लगभग 10-15 मिनटों में कुल 1650 राउंड गोलियां चलीं.

ब्रितानी सरकार के आंकड़ों के अनुसार कुल 379 लोग मारे गए थे लेकिन ग़ैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ मरने वालों की संख्या एक हजा़र से भी ज़्यादा थी.

बेरुत में फलस्तीनियों की हत्या

13 अप्रैल 1975

Image caption इस हिंसा के बाद लबनान में रह रहे फलस्तीनियों और ईसाई गुटों के बीच हिंसक झड़पें तेज़ हो गई थी.

को लबनान की राजधानी बेरुत में 17 फ़लस्तीनियों की हत्या कर दी गई थी. लबनान के एक दक्षिणपंथी गुट 'फ़लेन्जिस्ट' के बंदूक धारियों ने ईसाई बहुल इलाक़े से होकर गुज़र रही एक बस में बैठे फ़लस्तीनियों पर हमला किया. हमले में 17 फ़लस्तीनी मारे गए और 30 के क़रीब लोग घायल हो गए. मारे जाने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

झगड़े की शुरुआत तब हुई जब जीप में सवार फ़लस्तीनी छापामारों ने एक चर्च के बाहर जमा लोगों पर गोलीबारी की जहां दक्षिण पंथी गुट 'फ़लेन्जिस्ट' के नेता पीयर गेमायल भी मौजूद थे. पीयर गेमायल के समर्थकों ने एक जीप को आग लगा दी. थोड़ी देर बाद जब उसी इलाक़े से फ़लस्तीनियों से भरी बस गुज़री तो फ़लेन्जिस्ट गुट के लोगों ने बस पर हमला कर दिया.

टाइगर वुड्स 21 साल की उम्र में मास्टर्स विजेता बने

13 अप्रैल 1997

Image caption वुड्स इस जीत के बाद लगातार आगे बढ़ते रहे.

को अमरीका के गोल्फ़ खिलाड़ी एल्ड्रिक टाइगर वुड्स 21 साल की उम्र में यूएस मास्टर्स चैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए.

यही नहीं वो गो

ल्फ़ का कोई बड़ा ख़िताब जीतने वाले पहले काले खिलाड़ी बने. प्रतियोगिता जीतने के बाद वुड़्स ने कहा था कि अपनी जीत के ज़रिए वो ज़्यादा से ज़्यादा अल्पसंख्यकों को गोल्फ़ खेलने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.

वुड्स बचपन से ही एक अद्भुत खिलाड़ी थे और सिर्फ़ तीन साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला मुका़बला जीता था.

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