स्वामी अग्निवेश पर निगरानी का आदेश

अन्ना हज़ारे और स्वामी अग्निवेश इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पिछले दिनों लोकपाल विधेयक पर अन्ना हज़ारे के अनशन के दौरान स्वामी अग्निवेश काफ़ी सक्रिय थे

छत्तीसगढ़ की सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर निगरानी रखने के आदेश जारी किए हैं.

राज्य के ख़ुफ़िया विभाग से कहा गया है कि वह अग्निवेश की हर गतिविधि पर नज़र रखें. इस आशय का आदेश राज्य के गृह मंत्री ननकीराम कँवर ने जारी किया है.

बीबीसी से एक साक्षात्कार में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ने आरोप लगाया है कि बिनायक सेन के साथ-साथ स्वामी अग्निवेश भी माओवादियों के शहरी नेटवर्क का हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा कि डॉक्टर बिनायक सेन सान्याल नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे और उन्हें लगता है कि अग्निवेश भी शहरी नेटवर्क में हैं.

कँवर का कहना था कि उन्होंने "व्यक्तिगत रूप से" पुलिस विभाग से स्वामी अग्निवेश पर निगरानी रखने का लिखित आदेश दिया है.

इतना ही नहीं गृहमंत्री का कहना है कि उन संगठनों पर भी नज़र रखी जा रही है जो अपने काय्रक्रमों में स्वामी अग्निवेश को आमंत्रित करते हैं.

मामला

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब स्वामी अग्निवेश 11 से 14 अप्रैल के बीच दंतेवाड़ा के चिंतलनार इलाक़े के कुछ गाँवों में कथित रूप से सुरक्षा बलों की ज़्यादतियों के पीड़ित लोगों से मिलने जा रहे थे.

इन आरोपों के बाद कि सुरक्षा बलों ने आदिवासियों के 300 घरों को जला दिया है, महिलाओं से बदसुलूकी की है और कुछ ग्रामीणों को मार गिराया है, अग्निवेश आर्ट ऑफ़ लीविंग के आचार्य मिलिंद के साथ राहत सामग्री लेकर उस इलाक़े में जा रहे थे.

आरोप हैं कि राहत लेकर जा रहे अग्निवेश के काफ़िले को दोरनापाल के पास रोका गया और उन पर हमला किया गया. इस दौरान ना सिर्फ़ उनके और आचार्य मिलिंद के साथ धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उनकी गाड़ी पर पत्थर और अंडे फेंके गए.

यह सब कुछ बावजूद इसके हुआ जबकि स्वामी अग्निवेश को राज्य सरकार की तरफ़ से काफ़ी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. अग्निवेश ने उस इलाक़े में दो बार जाने की कोशिश की लेकिन दोनों ही बार उन्हें हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा.

अग्निवेश का आरोप है कि कोया कमांडो और विशेष पुलिस अधिकारियों नें उन पर हमला किया. ना सिर्फ़ उनपर बल्कि बस्तर संभाग के कमिश्नर, दंतेवाड़ा के कलक्टर और पत्रकारों पर भी इसी गुट की ओर से हमले किये गए.

ज़िम्मेदारी

यहाँ तक कि अनुमंडल अधिकारी, कलक्टर और कमिश्नर को भी विशेष पुलिस अधिकारियों और कोया कमांडो ने पीड़ित गाँवों में जाने से रोक दिया.

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि चिंतलनार इलाक़े की घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री रमन सिंह को लेनी चाहिए.

इसके अलावा इस मामले को लेकर अग्निवेश सुप्रीम कोर्ट भी गए जहां अदालत ने छत्तीसगढ़ की सरकार से पूछा कि आख़िर यह कोया कमांडो कौन हैं और उन्हें कैसे बहाल किया गया है.

वहीं दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि स्वामी अग्निवेश और राहत लेकर जा रहे अधिकारियों को लोगों के "स्वाभाविक आक्रोश" का सामना करना पड़ा.

रमन सिंह कहते हैं, "वह ऐसा स्थान है जहां लगातार तीन बड़ी घटनाओं में सीआरपीएफ़, विशेष पुलिस अधिकारी और कोया कमांडो के 91 जवान शहीद हुए हैं. उस क्षेत्र में तहसीलदार के नेतृत्व में राहत सामग्री लेकर जाने वालों पर आक्रमण हुआ. मुझे लगता है कि जब तक स्थिति सामान्य ना हो, वहाँ पर जाने में दिक्कत आ सकती है क्योंकि उस क्षेत्र के लोगों के मन में आक्रोश है. उन्हें लगा के लोग राहत लेकर नक्सलियों के सहयोग और समर्थन के लिए जा रहे हैं. अब चक्का जाम की स्थिति में पुलिस के अधिकारी क्या कर सकते हैं जब आम आदमी वाहन लेकर बैठे हैं. दो हज़ार लोग बैठे हैं. तो लोग लौट कर आ गए. ठीक है. कुछ अंडे फेंके गए. जब स्वाभाविक आक्रोश स्थानीय लोगों में आता है तो उसकी प्रतिक्रिया होती है."

चिंतलनार के घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार ने वह सीडी सार्वजनिक की, जिसमें स्वामी अग्निवेश माओवादियों द्वारा 25 जनवरी को अगवा किए गए पांच जवानों की रिहाई के लिए मध्यस्थता करने नारायणपुर ज़िले के अबूझमाड़ के जंगलों में गए हुए थे.

अग्निवेश का कहना है कि वह छत्तीसगढ़ की सरकार के अनुरोध पर मध्यस्थता करने आए थे. उनके साथ मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नौलखा और कविता श्रीवास्तव भी शामिल थी.

आरोप

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कँवर का कहना है कि सीडी में अग्निवेश को "भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को लाल सलाम" का नारा लगाते हुए दिखाया गया है.

बीबीसी को दिए साक्षात्कार में कँवर कहते हैं, "आप सीडी देखेंगे तब समझ में आएगा. वह नारे लगा रहे हैं भारत की सेना वापस जाओ." कँवर का कहना है कि सरकार मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना नहीं चाहती है.

उन्होंने कहा, "विभाग के लोग और मुख्यमंत्री भी कहते हैं कि मधुमक्खी के छत्ते में हाथ मत डालो. लेकिन हाथ तो डालना ही है माओवादियों के शहरी नेटवर्क में. अब साधू के वेश में तो मुश्किल है ना."

गृह मंत्री का कहना है कि अब आम लोग भी अग्निवेश के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

कँवर आगे कहते हैं, "विभाग को मैंने व्यक्तिगत रूप से बोल दिया है कि उन पर निगरानी रखे, जितने संगठनों में वह जाते हैं उन संगठनों के क्रियाकलापों पर भी नज़र रखें."

उन्होंने बताया कि निगरानी का मतलब ये कि वे किस तरह के लोगों से मिलते हैं, किस तरह उनको बहकाते हैं और किस तरह के लोगों के साथ काम करते हैं.

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