अकेलेपन ने ले ली जान

Image caption डॉक्टरों के मुताबिक सोनाली का ब्ल्ड प्रेशर बहुत कम है और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है.

सोनाली और अनुराधा जाने कब से दुनिया की नज़रों से छिपी रही.

जब बाहरी दुनिया कि नज़र उन पर पड़ी तो उन्हें अस्पताल लाया गया लेकिन तबतक थोड़ी देर हो चुकी थी. इनमें से एक की मौत हो गई और एक ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रही है.

राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में रहने वाली सोनाली और अनुराधा ने पिछले एक महीने से अपनेआप को घर में बंद कर लिया था और पड़ोसियों और पुलिस की कोशिशों के बावजूद किसी से नहीं मिल रहीं थीं.

एक बहन की मौत

लेकिन एक गैर-सरकारी संस्था की कोशिशों से जब उन्हें बाहर निकाला गया तो अचानक उनकी ज़िन्दगी तमाशा बन गई.

अकेलेपन से अवसाद

मैंने जब नौएडा के कैलाश अस्पताल के आईसीयू में झांका तो एक दुर्बल सा हड्डियों का ढांचा दिखाई दिया.

डॉक्टरों ने बताया कि यही सोनाली बेहल हैं.

इन्होंने कई दिनों से ठीक से कुछ खाया नहीं है और इनका ब्ल्ड प्रेशर बहुत कम है, ये दवाओं के सहारे ज़िन्दा हैं.

इनकी बड़ी बहन अनुराधा को डॉक्टर नहीं बचा सके.

अस्पताल लाए जाने के कुछ घंटों में ही उनकी मौत हो गई. सोनाली को ये नहीं बताया गया. इस वक्त उनकी आंखें बंद हैं, वर्ना वो मुझे देखकर चिल्लातीं.

डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें लोगों से मिलने से डर लगता है.

सोनाली के मनोचिकित्सक डॉ. जी.आर. गुलेचा बताते हैं कि, "उसे स्किज़ोफ्रेनिया है, उसे भ्रम होता है कि कोई महिला उसका पीछा कर रही है और उसे नुकसान पहुंचाना चाहती है, इसीलिए वो किसी से नहीं मिलना चाहती."

ये कैसा परिवार

ऐसा नहीं कि सोनाली और अनुराधा का परिवार नहीं है.

कुछ साल पहले तक उनका छोटा भाई विपिन उनके साथ रहता था. लेकिन शादी के बाद उनके भाई ने ये घर छोड़ एक अलग घर बसा लिया.

करीब 15 साल पहले, अपने मां-बाप खो चुकी दोनों बहनें एकदम अकेली हो गईं.

इसी दौरान एक गार्मेंट फैक्टरी में काम कर रही सोनाली की नौकरी चली गई.

सोनाली और अनुराधा के पड़ोसी बताते हैं कि इसके बाद दोनों बहनों ने एक कुत्ता पाला, लेकिन कुछ समय पहले वो भी मर गया.

डॉक्टरों के मुताबिक, अकेलेपन और असुरक्षा की भावना से जूझ रही ये बहनें मानसिक रूप से बीमार हो गईं.

गंभीर अवसाद ने कैसे इतना भयानक रूप ले लिया, ये कहना मुश्किल है. लेकिन डॉ. गुलेचा कहते हैं कि समाज से सहारा मिलता तो शायद समय रहते कुछ किया जा सकता था.

राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष यासमीन अबरार भी सोनाली से मिलीं और उनके भाई और पड़ोसियों से बातचीत की.

उनके मुताबिक समाज के बदलते ढांचे कुछ हद तक ऐसी परिस्थितियों के लिए ज़िम्मेदार हैं.

यासमीन कहती हैं, "संयुक्त परिवार से छोटे परिवार की ओर बढ़ता चलन आपसी रिश्तों पर असर डाल रहा है, उन्हें कमज़ोर कर रहा है."

डॉक्टरों के मुताबिक सोनाली का ब्ल्ड प्रेशर बहुत कम है और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है.

दोनों बहनों के अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद अब उनके भाई विपिन उनकी देखरेख कर रहे हैं.

विपिन कई महीनों से अपनी बहनों से नहीं मिले थे, अब उनका कहना है कि उनकी बड़ी बहन की मौत का उन्हें अफसोस है और उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनकी बहनों की ऐसी हालत हो गई है.

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