12 साल के कार्यकर्ता की मौत...

Image caption दुनियाभर में बाल मज़दूरी के खिलाफ़ कड़े कानून बनाए गए हैं, फिर भी यह जारी है.

16 अप्रैल 1995 को आज ही के दिन 12 साल के एक कार्यकर्ता इक़बाल मसीह को पाकिस्तान में गोली मार दी गई थी जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

12 साल के इक़बाल मसीह का जन्म 1983 में हुआ और वह एक पाकिस्तानी-ईसाई लड़का था. चार साल उम्र में इक़बाल को बंधुआ मज़दूरी में धकेल दिया गया.

10 साल की उम्र में अपने अधिकारों के बारे में जानने के बाद इक़बाल न सिर्फ खुद उस कारख़ाने से बाहर निकला बल्कि अपने जैसे दूसरे बच्चों को भी बाहर निकाला.

इसके बाद उसने एक गैर सरकारी संस्था की मदद से स्कूल में दाखिला लिया और बाल मज़दूरी के खिलाफ़ मुहिम छेड़ दी.

इक़बाल ने इस संस्था और पुलिस की मदद से कई कारख़ानों से बाल मज़दूरों को रिहा कराया था और इसके चलते कम उम्र का यह बच्चा अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया.

16 अप्रैल 1964: ‘द ग्रेट ट्रेन रॉबरी’ के लिए 300 साल की सज़ा

ब्रिटेन के इतिहास में सबसे बड़े और बहुचर्चित अपराध के रुप शामिल ‘द ग्रेट ट्रेन रॉबरी’ के लिए 16 अप्रैल 1964 को 12 लोगों को 307 साल की सज़ा सुनाई गई.

इन लोगों ने 1963 के अगस्त महीने में ग्लासगो से लंदन जा रही एक ट्रेन को बंधक बनाया और उस ट्रेन से 26 लाख पाउंड के नोट लूट लिए थे.

इस डकैती में शामिल तीन लोग अब भी फ़रार हैं जिनमें चोरों के दल का मुखिया ब्रूस रेनल्डस शामिल है.

16 अप्रैल 1919: शहीदों की याद में गांधी की ‘प्रार्थना सभा’

1919 में भारत के अमृतसर शहर में हुए जलियांवाला बाग़ हत्याकांड में मरने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए 16 अप्रैल को महात्मा गांधी ने प्रार्थना सभा और उपवास की घोषणा की.

जलियांवाला बाग़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास एक छोटा सा बागीचा है जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनेल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फ़ौज ने गोलियां चला के सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था.

यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यही थी.

संबंधित समाचार