नाविकों के बदले लुटेरों की रिहाई की मांग

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Image caption जल दस्युओं द्वारा फिरौती लेकर पलटने की ये पहली घटना है

भारतीयों का अपहरण करने वाले सोमाली जलदस्युओं के फिरौती लेने के बावजूद बंधकों को ना छोड़ने से हडकंप मचा हुआ है.

जहाज़ के मालिकों ने एक बयान में सोमाली लुटेरों से अपील की है की वो उनके लोगों को छोड़ दें क्योंकि उन्हें फिरौती दी जा चुकी है.

कंपनी ने लुटेरों से कहा है कि अगर उन्होंने नाविकों को नहीं छोड़ा तो दुनिया भर के जो जहाज़ सोमालिया में बंधक हैं उनके मालिकों का भरोसा लुटेरों की बात पर से उठ जाएगा.

मुम्बई स्थित जहाज़ कंपनी ओएमसीआई शिप मैनेजमेंट के प्रवक्ता सुनील पुरी ने बीबीसी को बताया, " हमने उनकी तमाम शर्तों को पूरा कर दिया है लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है की बावजूद इसके बंधकों लोगों को नहीं छोड़ा है. इसके पहले आजतक कभी ऐसा नहीं सुना गया. हमसे अभी तक किसी ने भी सोमाली लुटेरों की तरफ से संपर्क नहीं किया है."

कंपनी को कोई ख़बर नहीं

पुरी आगे कहते हैं, "हमने ख़बरों में पढ़ा है की सोमाली लुटेरे अपने साथियों की रिहाई चाहते हैं लेकिन हमें अब तक औपचारिक रूप से कहीं से कोई सूचना नहीं मिली है."

अमरीकी अख़बार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक ख़बर के मुताबिक जहाज़ कंपनी ने सोमाली लुटेरों को करीब 13 करोड़ रुपयों से ज़्यादा की फिरौती दी है लेकिन बावजूद उसके लुटेरे अपनी बात से पलट गए हैं.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक लुटेरे ये चाहते हैं कि भारत अपने यहां बंद सौ से ऊपर सोमाली लुटेरों को छोड़े. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक लुटेरे के हवाले से कहा है, " भारत ने न केवल हमारे खिलाफ़ युद्ध छेड़ रखा है, बल्कि उसने अपने लोगों की जान को भी ख़तरे में डाल रखा है."

'एस्फ़ाल्ट वेंचर' नाम के इस जहाज़ का अपहरण 28 सितम्बर 2010 को हुआ था. महीनों तक चले मोल भाव के बाद लुटेरे 15 अप्रैल को इस जहाज़ को छोड़ने लिए तैयार हो गए.

तय तारीख़ को लुटेरों ने जहाज़ तो छोड़ दिया लेकिन जहाज़ के 15 कर्मचारियों में से केवल आठ को ही छोड़ा बाकी सात को लुटेरों ने अपने पास रख लिया.

सुनील पुरी के अनुसार जहाज़ अभी तक सोमालिया की समुद्री सीमा में खड़ा है.

भारतीय कार्रवाई सख़्त

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Image caption भारतीय जेलों में इस समय सौ से ज्यादा जलदस्यु बंद हैं.

भारतीय नौसेना पिछले कुछ समय से आक्रमक रूप से सोमाली जलदस्युओं के पीछे पड़ी है. एक तरफ़ सोमाली लुटेरों ने सोमालिया की सीमा से बहुत दूर आकर भारतीय समुद्री सीमा के नज़दीक जहाजों पर हमले करने लगे थे.

इसके बाद भारत सरकार ने भारतीय नौ सेना को अधिक सक्रिय कर दिया.

भारतीय नौ सेना के युद्ध पोत कई व्यापारी ज़हाजों को को अदन की खड़ी में सुरक्षा देते हैं जिसके कारण भी लुटेरों में भारत के खिलाफ़ गुस्सा है.

चंद रोज़ पहले भारतीय नौसेना ने एक बड़ी कार्रवाई में 60 के ऊपर जल दस्युओं को गिरफ्तार कर लिया था.

भारतीय जेलों में इस समय सौ से अधिक जलदस्यु बंद हैं.

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