जैतापुर में प्रदर्शन, फ़ायरिंग में एक मरा

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Image caption कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन जैतापुर में परमाणु संयंत्र लगाने के ख़िलाफ़ है.

पुलिस के मुताबिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में बनने वाले जैतापुर आणविक संयंत्र का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई.

व्यक्ति का नाम तबरेज़ सोलकर बताया जा रहा है और इनकी उम्र 22 साल बताई जा रही है. रत्नगिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड ने बीबीसी को बताया कि ये घटना दोपहर को हुए एक उग्र प्रदर्शन के दौरान हुई.

गायकवाड के मुताबिक करीब 700-800 मछुआरों ने नाटे गाँव स्थित पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया. उस वक्त चार या पाँच पुलिस कर्मी थाने में मौजूद थे.

'थाने में तोड़-फोड़'

पास ही स्थित साकरी नाटे गाँव में ज़्यादातर मछुवारे रहते हैं. ये गाँव संयंत्र की जगह से करीब 7-8 किलोमीटर की दूरी पर है.

रत्नगिरी के कलेक्टर मधुकर गायकवाड ने कहा, " भीड़ ने थाने में तोड़-फोड़ की, रिकॉर्ड रखने वाले कमरे में आग लगा दी, कंप्यूटर और टीवी को तोड़ डाला, पुलिस के वायरलेस को भी तोड़ दिया गया और एक पुलिस वैन को भी आग लगा दी गई. लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया, आंसू-गैस के गोले छोड़े और प्लास्टिक की गोलियों का इस्तेमाल किया, लेकिन फ़ायदा नहीं हुआ, तब लोगों को छितराने के लिए पुलिस को गोली का इस्तेमाल करना पड़ा. जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई."

गायकवाड के मुताबिक पथराव में करीब 50 पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं. उनके मुताबिक अभी इस घटना में किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

वो बताते हैं कि उनके गुप्त सूचना तंत्र को पुलिस स्टेशन पर हमले का पता नहीं था और ये हमला अचानक हुआ. गाँव में मौजूद अमजद बोरकर बताते हैं कि लोगों में घटना को लेकर नाराज़गी है और स्थिति तनावपूर्ण है.

शिवसेना का प्रदर्शन

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Image caption इस क्षेत्र में रहने वाले मछुवारों को चिंता है कि परमाणु संयंत्र से उनके रोज़गार का साधन ख़तरे में पड़ जाएगा.

इससे पहले सुबह माडबन गाँव के पास संयंत्र बनने वाली जगह पर शिवसेना ने विरोध प्रदर्शन किया जिसका नेतृत्व पार्टी नेता राजन सालवी ने किया था. इसमें करीब 200 शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. पुलिस ने करीब 30 लोगों को गिरफ़्तार किया.

गायकवाड के मुताबिक इस घटना में कार्यकर्ताओं की ओर से पथराव में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और पाँच अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए. साथ ही पाँच-छह प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं.

स्थानीय लोग जैतापुर में बनने वाले 9900 मेगावॉट परमाणु ऊर्जा संयंत्र के ख़िलाफ़ हैं, हालांकि इसे पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन जापान में आए सूनामी और भूकंप की वजह से परमाणु संयंत्रों की हालत के बाद भारत में इन संयंत्रों को लेकर बहस तेज़ हुई है.

ये संयंत्र सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड फ़्रांस की कंपनी अरेवा के सहयोग से बना रही है. कहा जा रहा है कि पूरा हो जाने पर ये एशिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा.

संयंत्र को लेकर शिकायतें

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Image caption जैतापुर में परमाणु संयंत्र में फ़्रांस की कंपनी अरेवा के सहयोग से बन रहा है.

इस संयंत्र को लेकर शिकायतें कई हैं- परमाणु ऊर्जा बिजली पाने का एक ख़तरनाक तरीका है, रेडियोधर्मी कूड़े को संभालकर रखने का तरीका स्पष्ट नहीं है, यहाँ से पैदा बिजली महंगी होगी, फ्रेंच कंपनी अरेवा का सेफ़्टी रेकॉर्ड संदिग्ध है और पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव पर तैयार की गई रिपोर्ट नाकाफ़ी है.

लेकिन चिंता पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील इस इलाके पर पड़ने वाले असर को लेकर भी है क्योंकि यहाँ जैतापुर आणविक संयंत्र के अलावा कोयले से चलने वाले दूसरे संयंत्रों की भी योजना है.

आलोचकों का कहना है कि उन्हें चिंता इस बात की है कि विकास के होड़ में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के विचारों और भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.

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