पीएसएलवी सी 16 का सफल प्रक्षेपण

पीएसएलवी (फाइल फोटो)
Image caption अंतरिक्ष जगत में भारत की स्थिति लगातार मज़बूत हो रही है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी सी-16 का श्रीहरिकोटा से सफ़ल प्रक्षेपण किया है जो तीन उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा.

पीएसएलवी सी-16 अपने साथ रिसोर्ससैट-2, एक्ससैट और यूथसैट ले जा रहा है जिनके अलग अलग कार्य होंगे. पीएसएलवी इन तीनों उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित करेगा.

प्रक्षेपण के बाद इसरो के चेयरमैन के राधाकृष्णन ने कहा कि यह भारत के इतिहास में एक बड़ा क़दम है.

राधाकृष्णन का कहना था, '' पीएसएलवी-सी16 रिसोर्ससैट 2 मिशन सफल रहा है और मैं इसके लिए पूरे देश को बधाई देता हूं.''

इन तीनों में से एक भारतीय, एक रुसी और और एक सिंगापुर का उपग्रह है.

पीएसएलवी सी -16 का प्रक्षेपण ऐसे समय में हुआ है जब चार महीने पहले ही जीएसएलवी एफ-06 का प्रक्षेपण असफल रहा था.

इस वर्ष इसरो का यह पहला प्रक्षेपण है. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10.12 मिनट पर पीएसएलवी सी -16 को छोड़ा गया और प्रक्षेपण सफल रहा है.

इस प्रक्षेपण वाहन में भारत में निर्मित रिसोर्ससैट-2 उपग्रह है जो रिसोर्ससैट 1 की जगह लेगा. रिसोर्ससैट 2 की उम्र पाँच साल की होगी और इसका इस्तेमाल आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किया जाएगा.

रिसोर्ससैट 2 में कुछ ऐसे उपकरण भी लगाए गए हैं जो जहाज़ों पर निगरानी रख सकेंगे और उनके स्थान, गति और अन्य चीज़ों के बारे में जानकारी जुटा सकेंगे.

रिसोर्ससैट 2 भारत की रिमोट सेंसिंग सीरिज़ का ताज़ा उपग्रह है जिसे आईआरएस पी 6 के नाम से भी जाना जाता है. इसका कार्य ज़मीन पर मौजूद जल संपदा की निगरानी करना, जंगलों और तटीय इलाक़ों के बारे में आकड़े जुटाना है.

यह उपग्रह समुद्र के बारे में भी नई जानकारियां जुटा सकेगा.

रिसोर्ससैट के अलावा अंतरिक्ष में यूथसैट को भी छोड़ा गया है जो भारत और रुस ने मिलकर बनाया है. यूथसैट में तीन छोटे छोटे पेलोड हैं जिसे बनाने में दो देशों के विश्वविद्यालयों ने सहयोग किया है. यूथसैट में आएबीआईटी और एलआईवीएचएसआई भारतीय हैं जबकि तीसरा पेलोड एसओएलआरएएड रुसी है. ये तीनों पेलोड मिलकर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल के बारे में अलग अलग जानकारियां जुटाएंगे

पीएसएलवी सी-16 पर तीसरा उपग्रह एक्स सैट है जो सिंगापुर का पहला सेटेलाइन या उपग्रह होगा. इसका काम सिर्फ़ रिमोट सेंसिंग और सिंगापुर की नानकिंग यूनिवर्सिटी के शोध केंद्र के लिए छवियां जुटाने में मदद करना होगा.

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