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ममता बनर्जी
Image caption अमरीका ममता बनर्जी से अच्छे संबंध रखने की कोशिश कर रहा है.

विकीलीक्स के छापे गए ताज़ा दस्तावेज़ों से ये बात सामने आई है कि भारत स्थित अमरीकी राजनयिक अपनी हुकूमत को तृणमूल कांग्रेस से बेहतर संबंध की सलाह दे रहे थे ताकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनने की सूरत में उन्हें इस संबंध का फ़ायदा पहुँचे.

कोलकाता में मौजूद अमरीकी राजनयिक बेथ पाईने ने अपने संदेश में कहा है, "जनता के बीच उनके दल के बयान जिसमें अमरीका विरोधी भावनाएं नहीं दिखतीं, और साथ ही उनकी अमरीकी अधिकारियों से सम्पर्क साधने की कोशिशें बहुत ही प्रोत्साहित करनेवाली हैं जिससे लगता है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार वामपंथियों के मुक़ाबले अमरीका के प्रति ज़्यादा मित्रवत होंगी."

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदू में छापे गए विकीलीक्स दस्तावेज़ों में पाईने ने सरकार को ममता बनर्जी से संबंध बेहतर बनाने की कोशिशों को जारी रखने की सलाह दी है.

संदेश में उम्मीद जताई गई है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री बन सकती हैं.

हालांकि संदेश में इस बात को लेकर अनिश्चितता जताई गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस नेत्री वाक़ई एक तेज़ तर्रार नेता की जगह ख़ुद को सफल प्रशासक के तौर पर ढाल पाने में सफल हो पाई हैं.

कहा गया है कि ममता बनर्जी में दिख रही तब्दीली - जिसमें वो शांत, सोच समझ और सलाह मशविरे लेकर काम करनेवाली व्यक्ति दिखती हैं; क्या वाक़ई में एक बदलाव है या महज़ एक राजनीतिज्ञ का नया जामा?

पाईने ने कहा है कि मई 2009 के संसदीय चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय पार्टी से केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार को समर्थन देनेवाले दूसरे अहम राजनीतिक दल के रूप में उभरी है जिसके बाद ममता बनर्जी ख़ुद को लगातार पश्चिम बंगाल की भावी मुख्य मंत्री के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही हैं.

इसके लिए वो अपने रेल मंत्री के पद, विपक्षी दल के नेता के तौर पर अपने रसूख़ और अपने व्यक्तिगत संसाधनों का इस्तेमाल कर रही हैं. उनके समर्थक और विरोधी दोनों उनमें आए बदलाव की बात मान रहे हैं लेकिन वो इस बात को लेकर सवाल उठाते हैं कि ये वाक़ई बदलाव है या महज़ एक नई 'पैकेजिंग' है.

संदेश में कोलकाता स्थित दूतावास उद्योग जगत के साथ ममता बनर्जी के बेहतर तालुक्क़ात क़ायम करने के प्रयास से ख़ासा प्रभावित दिखता है हालांकि सिंगुर और नंदीग्राम में उनके मुहिम को लेकर उन्हें कुछ लोग 'उद्योग-विरोधी' मानने लगे थे.

कहा गया है कि अपनी इस छवि को बदलने के लिए ममता बनर्जी ने कई सलाहकार नियुक्त किए हैं जो सम्मानित व्यवसायी हैं.

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