ट्रस्ट के लिए खींचतान शुरु

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Image caption साईबाबा के पार्थिव शरीर को देखने के लिए हज़ारों लोग जुट रहे हैं.

सत्य साई बाबा ने अपने पीछे जो चालीस हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति और विरासत छोड़ी है उस को लेकर उन के करीबी लोगों के बीच खामोशी से खींचा तानी शुरू हो गई है.

हालांकि आम राय यह है कि जाने माने व्यक्तियों से बना सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट इस समस्या का कोई समाधान निकाल लेगा.

बुधवार को साईंबाबा के अंतिम संस्कार के बाद सम्भावना है कि सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट की बैठक होगी और उसमें इसी सवाल पर कोई फैसला होगा कि बाबा के बाद ट्रस्ट का काम कौन संभालेगा.

अब तक इस ट्रस्ट के अध्यक्ष साईं बाबा ही थे और ट्रस्ट की हर बैठक की अध्यक्षता वही करते थे लेकिन अब यह पहली बैठक होगी जो बाबा के बिना होगी.

जहाँ तक बाबा की संपत्ति की विरासत के लिए होने वाले खामोश युद्ध का सवाल है इसमें दो नाम उभर कर सामने आए हैं.

एक तो साईं बाबा के भतीजे आर जे रत्नाकर हैं जिन्हें गत वर्ष ही इस ट्रस्ट में शामिल किया गया था. वो बाबा के परिवार के एक मात्र सदस्य हैं जिन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया.

रत्नाकर स्थानीय भक्ति टीवी चैनल चलाते हैं. उन्हें उनके पिता जानकीरम की मौत के पांच वर्ष बाद उनके स्थान पर ट्रस्ट में लिया गया.

रत्नाकर चाहते हैं कि बाबा के बाद उनकी विरासत उनके परिवार वालों को ही मिलनी चाहिए. परिवार के दूसरे सदस्य भी यही चाहते हैं लेकिन वो रत्नाकर के ख़िलाफ़ हैं.

दूसरे व्यक्ति का नाम सत्यजीत है. वो इस ट्रस्ट के सदस्य तो नहीं हैं लेकिन गत तीस वर्षों से वो बाबा के बहुत निकट रहे हैं और उनके व्यक्तिगत सहायक के रूप में काम करते रहे हैं.

रत्नाकर और सत्यजीत

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Image caption साईबाबा के निधन के बाद पुटट्पर्थी के आम लोगों में शोक है.

सत्यजित का सम्बन्ध चेन्नई से है और पांच वर्ष की आयु से वो साईं बाबा के आश्रम में रह रहे हैं. उनकी स्कूल की शिक्षा भी आश्रम में हुई और उन्होंने सत्य साईं विश्वविद्यालय से ही एमबीए किया.

उसके बाद भी वो आश्रम छोड़ कर जाने को तैयार नहीं हुए और उन्होंने आखरी दम तक बाबा की सेवा की.

ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार बाबा सत्यजीत की सेवा से इतने खुश हुए कि उन्होंने ने इच्छा जताई कि सत्यजित को भी ट्रस्ट में शामिल किया जाए.

सत्यजीत को ट्रस्ट में लेने और उन्हें ट्रस्ट की बाग़डोर थमाने के सवाल पर ट्रस्ट की बैठक में ही फैसला किया जायेगा.

इस ट्रस्ट में बाबा को छोड़ कर ग्यारह सदस्य हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश पीएन भगवती, उद्योगपति वी श्रीनिवासन और ट्रस्ट के सचिव पूर्व आईएस अधिकारी चक्रवर्ती भी शामिल हैं.

सेंट्रल ट्रस्ट के सामने एक बड़ी दुविधा यह भी है कि ट्रस्ट की तरफ से बैंक के चेक जारी करने का अधकार किसे दिया जाए.

अब तक यह अधिकार खुद बाबा और ट्रस्ट के सचिव चक्रवर्ति के पास रहा है. 1972 में इस ट्रस्ट को रजिस्टर करते समय जो दस्तावेज़ दाखिल किए गए थे उसमें न तो किसी को बाबा का उत्तराधिकारी नामज़द किया गया और ना ही उत्तराधिकारी चुनने का कोई तरीका तय किया गया. इस लिए यह एक कठिन समस्या है की ट्रस्ट आगे क्या करे.

इसी सन्दर्भ में कुछ लोगों ने मांग की है कि सत्य साईं की संपत्ति के दुरूपयोग को रोकने के लिए सरकार इस ट्रस्ट को अपने नियंत्रण में ले ले. लेकिन मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने इससे इंकार कर दिया है.

खुद ट्रस्ट के कुछ लोगों का कहना है कि अब तक जिस ईमानदारी के साथ इस ट्रस्ट को चलाया जाता रहा है वो सरकार के हाथ में जाने के बाद असंभव हो जाएगा.

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