साईं बाबा को समाधि दे दी गई

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सत्य साईं बाबा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ पुट्टपर्ति में उनके प्रशांति निलयम आश्रम में समाधि दे दी गई है. केवल परिवार के कुछ सदस्यों और साईं सेंट्रल ट्रस्ट के लोगों को उपस्थित रहने की अनुमति दी गई थी.

अंतिम संस्कार से पहले श्रद्धालु सुबह पाँच बजे से ही कुलवंत हॉल में जमा होने शुरु हो गए थे. हॉल में करीब 25 हज़ार लोग थे.

इसके अलावा बड़ी संख्या में हॉल के बाहर भी लोग थे जिन्हे अंदर नहीं आने दिया गया.

साईं बाबा को समाधि देने की क्रिया एक घंटे तक चली. इसके लिए पंडितों का विशेष दल बुलाया गया था. सिख, ईसाई और अन्य धर्मों के धर्मगुरुओं ने धार्मिक पुस्तकों से पाठ पढ़कर सुनाए.

साईं बाबा से जुड़ी क्रिया उनके भतीजे रत्नाकर ने निभाई. इस दौरान रत्नाकर ने एक गाय, बछड़ा और सोना-चाँदी पुजारियों को दान में दिया.

जब तक प्रायश्चित क्रिया चल रही थी तक तक हॉल खुला था लेकिन उसके आगे की क्रिया के लिए पर्दा डाल दिया गया.

बाद में बाबा के पार्थिव शरीर को कब्र में उतारा गया. उनके शरीर के साथ कई नवरत्न और सोना भी रखा गया है.

इसके बाद बाबा के भक्तों समेत आंध्रप्रदेश के राज्यपाल और अन्य लोगों ने कब्र पर मिट्टी डाली.

अंतिम क्रिया

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी और राज्यपाल नरसिम्हन मंगलवार रात को पुट्टपर्ति में ही रहे और बुधवार की सुबह साईं बाबा के अंतिम संस्कार में मौजूद थे. इसके अलावा लाल कृष्ण आडवाणी और चंद्रबाबू नायडू भी उपस्थित थे.

मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने भी पुट्टपर्ति पहुंच कर सत्य साईं बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की थी.

इससे पहले सत्य साईं बाबा के अंतिम दर्शन का समय मंगलवार को शाम छह बजे से बढ़ाकर रात 11 बजे कर दिया गया था.

ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बाबा की आखिरी झलक पाने के लिए लोगों की ज़बरदस्त भीड़ उमड़ आई थी जो मंगलवार शाम को भी लोग पुट्टपर्ति नगर के बाहर तक लंबी कतार में खड़े हुए थे.

पहले साईं बाबा के दर्शन के लिए मंगलवार शाम सात बजे तक का समय रखा गया था और कहा गया था कि इसके बाद लोगों को उन्हें देखने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

कौन देखेगा ट्रस्ट का काम

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बाबा को दफ़नाने का फ़ैसला उनकी इस इच्छा अनुसार किया गया कि उन्हें भी शिर्डी के साईं बाबा की तरह ही दफ़नाया जाए.

भक्तों को यह भी उम्मीद है कि बाबा के आश्रम के सबसे मुख्य स्थान पर उनकी कब्र उसी तरह श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन जाएगी जैसी कि शिर्डी के साईं बाबा की बनी हुई है.

इस बीच सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के सदस्यों के साथ- साथ साईं बाबा के निजी सहायक सत्यजित और निजी डॉक्टर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

ऐसा इस शिकायत के बाद किया गया कि किसी ने सत्यजित को धमकियाँ दी हैं. शक्तिशाली और संपन्न सत्य साईं ट्रस्ट में बाबा की जगह के लिए जो दौड़ चल रही है उसमें सत्यजित का नाम ही सबसे आगे है और उन्हें ट्रस्ट के सचिव चक्रवर्ति का समर्थन भी प्राप्त है.

ऐसे आरोप लगाए जा रहें हैं कि कुछ ऐसे व्यक्ति जो ट्रस्ट में नहीं हैं साईं बाबा के भतीजे रत्नाकर को सत्यजीत की जगह देखना चाहते हैं. इनमें कुछ राजनेताओं के नाम लिए जा रहे हैं.

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