संजीव भट्ट की सुरक्षा हटाई गई

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Image caption संजीव भट्ट 1988 में भारतीय पुलिस सेवा में आए और उन्हें गुजरात काडर मिला.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हलफ़नामे के कारण चर्चा में आए पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट की सुरक्षा हटा ली गई है.

गुरुवार को गुजरात के पुलिस महानिदेशक ने संजीव भट्ट की सुरक्षा के लिए दिए गए पांच सिपाहियों को जूनागढ़ वापस आकर रिपोर्ट करने को कहा है.

गुजरात पुलिस के इस आदेश के बाद संजीव भट्ट ने अपने और अपने परिवारवालों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है.

संजीव भट्ट का कहना था कि ये दूसरी बार है कि उनकी सुरक्षा हटाई गई है जबकि राज्य की ख़ुफ़िया ब्यूरों उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा देने की सिफ़ारिश कर चुकी है.

गुजरात पुलिस और राज्य की ख़ुफ़िया ब्यूरों ने भी संजीव भट्ट को वाई श्रेणी की सुरक्षा देने की सिफ़ारिश की थी लेकिन गुजरात सरकार ने इसे दरकिनार कर दिया. इस श्रेणी के अंतर्गत सुरक्षा के लिए 11 गार्ड दिए जाते है.

परिवार को ख़तरा

पिछले दिनों संजीव भट्ट उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने 2002 में हुए गुजरात दंगो पर सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दाखिल किया था.

इस शपथपत्र में उन्होंने गुजरात दंगों की जांच कर रही विशेष जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे.

शपथपत्र में भट्ट ने कहा था कि विशेष जांच टीम के सामने उन्होंने जो भी बयान दिए थे वह गोपनीय नहीं रह सके है.

उनका कहना था कि विशेष जांच टीम के अधिकारियों से हुई उनकी बात गुजरात सरकार के उच्च स्तरीय लोगों तक पहुंच गई है.

उनका कहना था कि उनके बयान प्रेस में लीक हो चुके है और इससे अब उन्हें अपनी और अपने परिवार की जान का ख़तरा है.

इस ख़तरे के कारण उन्होंने गृह सचिव को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए तीन बार चिट्ठी लिखकर अपील की थी.

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