एंडोसल्फ़न पर प्रतिबंध के लिए हड़ताल

Image caption सस्ती क़ीमत के चलते बड़े स्तर पर एंडोसल्फ़न का इस्तेमाल किया जाता है.

'एंडोसल्फ़न' नामक कीटनाशक के इस्तेमाल पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को केरल राज्य में एक दिन की हड़ताल रही और जन-जीवन प्रभावित हुआ.

सस्ती क़ीमत वाले कीटनाशक एंडोसल्फ़न से इंसानों और पर्यावरण को हो रहे नुक़सान के चलते केरल सहित कई राज्यों में वामपंथी दल और सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से इस पर प्रतिबंध की मांग करते रहे हैं.

इस मांग को लेकर केरल में की गई इस हड़ताल के दौरान राज्यभर में आवाजाही के साधन सड़कों से नदारत रहे. इससे सरकारी दफ़्तरों और विश्वविद्दालयों में लोगों की मौजूदगी पर भी असर पड़ा.

‘एंडोसल्फ़न’ के इस्तेमाल से केरल के कासरगौढ़ ज़िले में अब तक कई मौतें हो चुकी हैं और कई लोग जानलेवा बीमारियों से ग्रस्त हैं. इस कीटनाशक में मौजूद घातक रसायन इंसानों के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो रहे हैं और बच्चे विक्षिप्तता के शिकार हो रहे हैं.

जैविक प्रदूषण

गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युत्यानंदन ने दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इस प्रतिबंध का समर्थन करने की अपील की थी.

इससे पहले 87 वर्षीय अच्युत्यानंदन इस मुद्दे पर अपनी दृढ़ता ज़ाहिर करने के लिए एक दिन का उपवास भी रख चुके हैं.

इस बीच जैविक प्रदूषण का कारण बनने वाले रसायनों पर प्रतिंबंध को लेकर जिनेवा में हो रही बैठक में भारत ने ‘एंडोसल्फ़न’ के प्रयोग को 'समय के साथ ख़त्म करने' की मंज़ूरी दे दी है.

इससे पहले भारत इस पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ था जबकि कासरगौढ़ के किसान और कई नेता एंडोसल्फ़न पर तत्काल प्रतिंबंध लगाने की मांग कर रहे हैं.

सुरक्षित विकल्प

इस बैठक में हुई सहमति के तहत ‘एंडोसल्फ़न’ को अब रसायनों की उस सूची में डाल दिया गया है जो इंसानों के लिए ख़तरनाक हैं और न सिर्फ़ उनका इस्तेमाल बल्कि उनका उत्पादन भी प्रतिबंधित है.

समझौते के तहत विश्व समुदाय अगले 11 सालों में ‘एंडोसल्फ़न’ को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देगा.

हालांकि भारत सरकार का कहना है कि ‘एंडोसल्फ़न’ पर पूरी तरह रोक लगाने से पहले उसे कम क़ीमत वाले एक सुरक्षित विकल्प की खोज करनी होगी.

सरकार की मांग है कि इसके लिए विश्व समुदाय एकजुट होकर काम करे.

संबंधित समाचार