पीएसी रिपोर्ट संसद में पेश हो: जोशी

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Image caption जोशी ने ये नहीं बताया कि अगर लोकसभा अध्यक्ष उनकी रिपोर्ट ख़ारिज कर देती हैं तो वो क्या करेगें

भाजपा और कांग्रेस के बीच 2 जी घोटाले पर लोक लेखा समिति कि रिपोर्ट को मुरली मनोहर जोशी ने लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवा दिया है और अध्यक्ष से ये आग्रह किया है कि इस रिपोर्ट को मंज़ूर करें.

एक प्रेस कांफ़्रेंस में उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि अब ये रिपोर्ट संसद में पेश की जाए.

रिपोर्ट लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवाने के बाद जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि समिति में कांग्रेस सदस्यों ने केंद्रीय मंत्रियों के दिशा निर्देशों पर काम करते हुए हंगामा किया.

उन्होंने कहा, "समिति में रिपोर्ट का विरोध करने वाले यूपीए से संबंधित संसद सदस्यों के पास पर्चियाँ आ रही थीं."

जोशी ने चिदम्बरम के बयानों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा, "जो मंत्रिगण समिति के सदस्यों को कठपुतलियों की तरह नचा रहे थे उनका नेतृत्व कौन कर रहा था?".

'विरोध असंवैधानिक'

लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी से जब ये पूछा गया कि समिति के सदस्यों ने बहुमत से जब उनकी रिपोर्ट खारिज कर दी तो रिपोर्ट का क्या मतलब रह जाता है तो उन्होंने सदस्यों के कदम को 'असंवैधनिक' बताया .

उन्होंने कहा, " ये तो उसी तरह हुआ कि हमारे विश्वविद्यालय छात्र हड़ताल के दौरान एक बैठक कर के कुलपति को बर्खास्त कर देते थे और किसी दोस्त को कुलपति घोषित कर देते थे. उनके द्वारा नामित कुलपति फिर कुल सचिव को बर्खास्त कर देता था. जब मैंने मत विभाजन की अनुमति ही नहीं तो मत का कोई मतलब ही नहीं है."

रिपोर्ट पर हुए विवाद पर उन्होंने कहा, "मामले का राजनीतिकरण न करें. रिपोर्ट का विरोध करने का सबको अधिकार है लेकिन दलगत आधारों पर पीएसी का कामकाज नहीं चल सकता. भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाली सरकार ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी. हमारी अपेक्षा है कि ये रिपोर्ट संसद में पेश हो."

'जोशी को चुनौती'

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुरली मनोहर जोशी के ऊपर पलटवार करते हुए कहा कि सदस्य नहीं जोशी नियम के ख़िलाफ़ काम कर रहे थे. सिंघवी ने दावा किया, "जोशी ने मत विभाजन इसलिए नहीं करवाया क्योंकि उन्हें पता था कि बहुमत उनके ख़िलाफ़ है. मैं जोशी जी को चुनौती देता हूँ कि वो आज मत विभाजन करा लें."

इस रिपोर्ट को लेकर हाल के दिनों में पीएस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ है. दरअसल मीडिया में इस रिपोर्ट के मसौदे के लीक होने की ख़बर पर विवाद खड़ा हो गया था.

लीक रिपोर्ट में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी कई सवाल उठाए गए हैं.

ये भी कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट में वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल की भी आलोचना की गई है.

लोक लेखा समिति का कार्यकाल शनिवार, 30 अप्रैल तक ही था.

अब नए अध्यक्ष का चयन होना है और परंपरा के अनुरुप नया अध्यक्ष भी विपक्ष का ही होगा.

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