विधायक समेत दस को उम्र कैद की सज़ा

विधायक शेखर तिवारी
Image caption विधायक शेखर तिवारी पर अभियोग था वह अपने करीबी ठेकेदारों का भुगतान रोके जाने से नाराज थे.

लखनऊ के विशेष सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र कुमार ने बहुचर्चित मनोज गुप्ता इंजीनियर हत्याकांड में सत्तारूढ़ दल बहुजन समाज पार्टी के विधायक शेखर तिवारी समेत 10 अभियुक्तों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

अदालत ने विधायक की पत्नी को सबूत मिटाने के जुर्म में ढाई साल की सज़ा सुनाई है.

अदालत ने औरैया ज़िले के दिबियापुर थाने के तत्कालीन प्रभारी होशियार सिंह को ह्त्या के षड्यंत्र का दोषी पाते हुए उन्हें भी उम्रक़ैद की सज़ा सुनायी है.

विधायक के साथ जिन अन्य लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई है उनमें बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय नेता योगेन्द्र दोहरे उर्फ भाटिया, मनोज अवस्थी, देवेन्द्र राजपूत, संतोष तिवारी, गजराज सिंह, पाल सिंह, विनय तिवारी और राम बाबू उर्फ पुत्ती शामिल हैं.

अभियुक्तों के वकील का कहना है कि इस फ़ैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी.

'फांसी की सज़ा होनी चाहिए'

मृत इंजीनियर मनोज कुमार गुप्ता के परिवार का कहना है कि अभियुक्तों को फांसी की सज़ा होनी चाहिए थी.

अभियोजन पक्ष के एक वकील आईबी सिंह के अनुसार अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि इस मामले में फ़ांसी की सज़ा इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि इस मामले में ‘परिस्थिति जन्य साक्ष्य’ थे और यह ‘बिलकुल अलग किस्म का हत्याकांड’ नहीं था, जिसमें फांसी की सज़ा दी जाती है.

इंजीनियर मनोज कुमार गुप्ता की ह्त्या दिसंबर 2008 में हुई थी, जब वह औरैया में लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता पद पर तैनात थे.

इंजीनियर मनोज गुप्ता की छवि एक ईमानदार अधिकारी की थी. वह ह्त्या से कुछ दिन पहले ही औरैया में तैनात हुए थे और उन्होंने कई ठेकेदारों का बिल भुगतान रोक दिया था.

विधायक शेखर तिवारी पर अभियोग था वह अपने करीबी ठेकेदारों का भुगतान रोके जाने से नाराज थे. इस कारण वह रात में उनके घर गए, उन्हें मारा-पीटा, बिजली के झटके दिए और मरणासन्न स्थिति में यह कहते हुए दिबियापुर थाने में छोड़ आए कि वह औरतों के साथ छेड़खानी कर रहा था और जनता ने उसे पीटा है.

थाना इंचार्ज होशियार सिंह पर अभियोग था कि उन्होंने भी इंजीनियर मनोज गुप्ता को मारा पीटा और उनकी मौत हो जाने पर वह इलाज के नाम पर उन्हें अज्ञात शव बताकर ज़िला अस्पताल में छोड़ आए.

छवि को धक्का

मामला सामने आने पर इस घटना ने बहुत तूल पकड़ा था. आरोप लगे थे कि विधायक शेखर तिवारी और उनके साथी मुख्यमंत्री मायावती के जन्म दिन के लिए जबरन चन्दा वसूल रहे थे और इस चक्कर में मनोज गुप्ता की मौत हो गयी.

मुख्यमंत्री ने इन आरोपों का खंडन किया था. लेकिन इस हत्याकांड से उनकी छवि को बहुत धक्का लगा.

सरकार ने दारोगा होशियार सिंह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया और आपराधिक मामला दर्ज कर सभी अभियुक्तों को जेल भेज दिया, लेकिन माया सरकार ने सीबीआई जांच की मांग नहीं मानी.

इंजीनियर मनोज गुप्ता लखीमपुर खीरी के रहने वाले थे और उन्होंने बीएचयू से इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी. उनकी ह्त्या पर विपक्षी दलों के अलावा इंजीनियर समुदाय ने भी आंदोलन किया था.

स्वर्गीय मनोज गुप्ता की माँ किरन गुप्ता ने लखीमपुर खीरी में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विधायक और उसके साथियों को फ़ांसी की सजा होनी चाहिए थी.

किरण गुप्ता का कहना है कि उनका बेटा इसलिए मारा गया क्योंकि वह ईमानदार था और उसके अंदर बीएचयू के संस्कार थे.

दूसरी ओर विधायक के वकील सुभाष त्रिपाठी का कहना है कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और वह हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

उम्रक़ैद की सज़ा पाने वाले सभी अभियुक्त जेल में हैं. केवल विधायक की पत्नी विभा तिवारी जेल से बाहर हैं. अदालत ने उन्हें 15 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है.

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