हसन अली मामले में चार्जशीट

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Image caption हसन अली पर विदेशी बैंकों में अवैध ढंग से कई सौ करोड़ रुपए रखने और टैक्स चोरी के आरोप हैं.

प्रवर्तन निदेशालय ने टैक्स की चोरी और काला धन मामले में हसन अली खान और उनके साथी कोलकाता व्यापारी काशीनाथ टापुरिया के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल कर दी है.

हसन अली के वकील आईपी बगेरिया ने इसकी पुष्टि की और कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने ये चार्जशीट ‘प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लाँडरिंग एक्ट या काला धन विरोधी कानून के अंतर्गत दायर की है.

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने बिहार कांग्रेस नेता अमलेंदु पांडे और पुदुचेरी के लेफ़्टिनेंट गवर्नर इकबाल सिंह से हसन अली को कथित तौर पर नकली पासपोर्ट पाने में मदद के मामले में पूछताछ की थी.

हथियारों की कालाबाज़ारी

हसन अली पर विदेशी बैंकों में अवैध ढंग से कई सौ करोड़ रुपए रखने और टैक्स चोरी के आरोप हैं. खबरों के मुताबिक उनके कई विदेशी बैंकों में खाते हैं.

उच्चतम न्यायालय में सीबीआई के जाँच के तरीकों की आलोचना होती रही है. सीबीआई पर ये आरोप लगे हैं कि वो बड़ी मछलियों पर अपना शिकंजा नहीं कस रही है.

हसन अली को सात मार्च को गिरफ़्तार किया गया था और घंटों उनसे पूछताछ हुई थी. उसके बाद काशीनाथ टापुरिया को गिरफ़्तार कर लिया गया. दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं.

मीडिया में हसन अली पर हथियारों के एक व्यापारी से संबंध होने के भी आरोप लगे हैं. उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने नकली कागज़ातों के सहारे मुंबई और पटना में कई पासपोर्ट हासिल किए.

विदेशी बैंकों में खाते

उधर हसन अली का कहना रहा है कि वो निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक साज़िश के तहत निशाना बना जा रहा है.

पुणे के निवासी हसन अली के बारे में मीडिया में खबरें आती रही हैं कि उनके स्विस खातों में कथित तौर पर करोड़ों रुपए जमा हैं. सालों से आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय उनके खातों और कथित काले धन की जाँच करता रहा है.

इसे लेकर उनके घरों पर छापे भी पड़ चुके हैं.

ऐसी अटकलें लगती रही हैं कि उनके पास जो काला धन है वो कई राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों का है और हसन अली इस धन को विदेशी बैंको में रखने का एक साधन मात्र हैं जिसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था.

इस मामले में सरकार पर भी यह कहकर निशाना साधा गया है कि सरकारी एजेंसियाँ हसन अली के मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं. यहाँ तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी एक टिप्पणी में सरकार से जैसे झुंझलाते हुए पूछा था कि आखिर देश में ये हो क्या रहा है.

हसन अली पर फ़ेमा

खबरों के मुताबिक हसन अली का पहले कहना था कि उनका रद्दी का व्यापार था और उनकी वार्षिक आय तीस लाख है.

उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार से यह पूछ चुकी है कि हसन अली खान जिन पर हेराफ़ेरी, आयकर की चोरी, हथियारों की कालाबाज़ारी और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों से संपर्क रखने के आरोप लगते रहे हैं. उन पर कड़े आतंकवाद विरोधी क़ानून जैसे पोटा का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है.

अदालत ने पूछा था कि हसन अली पर कड़े कानून जैसे फ़ेमा का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है?

अदालत ने पूछा कि अली के खिलाफ़ मामलों की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई को क्यों न दे दी जाए.

अदालत को बताया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय प्रमुख अरुण माथुर खुद जाँच की देखरेख कर रहे हैं.

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