'बवाल का भूमि अधिग्रहण से नाता नहीं'

भट्टा परसौल गांव इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption भट्टा परसौल में रविवार को हिंसा हुई थी.

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने देर शाम एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि नोएडा भट्टा परसौल और आगरा में हुए इस बवाल का भूमि अधिग्रहण से कोई सम्बन्ध नही है.

मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की ओर से बयाना देते हुए कैबिनेट सचिव ने कहा कि, "भोले भाले ग्रामीणों और किसानों को कुछ स्वार्थी तत्त्व आंदोलित करके कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं.’’

कैबिनेट सचिव ने बताया कि पिछले दो सालों में भट्टा परासौल ग्रामों में चार सौ चालीस एकड़ जमीन का धिग्रहण किया गया है और उसके लिए किसानों को तीन सौ करोड रूपये मुआवजा दिया जा चुका है.

कैबिनेट सचिव का कहना था कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक प्राधिकरण द्वारा विकास की सामान्य प्रक्रिया के तहत जमीनों का अधिग्रहण किया गया है.

लेकिन श्री शेखर पत्रकारों के इन प्रश्नों का उत्तर नही दे पाए कि विकास की परिभाषा क्या है और क्या असिका मतलब किसानों को उजाडना है?

वे इस प्रश्न का भी उत्तर नही दे पाए कि अगर जमीन अधिग्रहण मुदा नही था तो फिर किसान धरना क्यों दे रहे थे?

श्री शेखर का कहना था कि वर्तमान घटना इसलिए घटी क्योंकि किसानों ने तीन कर्मचारियों को बंधक बना लिया था और पुलिस ने उन्हें छुडाने के लिए कार्यवाही की

श्री शेखर ने बताया कि अब तक 22 लोग गिरफ्तार हैं. इनके अलावा छह किसानों नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए इनाम घोषित किया गया है. कैबिनेट सचिव के अनुसार इन्ही लोगों ने किसानों को भडकाकर हिंसा एके लिए प्रेरित किया.

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