जहाज़ों पर तैनात होंगे सशस्त्र बल

सोमाली जलदस्यु इमेज कॉपीरइट indian navy
Image caption पिछले कुछ महीनों में कई देशों के व्यापारिक जहाज़ों पर समुद्री लुटेरों के हमले हुए हैं

जहाजरानी मामलों के महानिदेशक एसबी अग्निहोत्री ने बीबीसी को बताया है कि समुद्री लुटेरों से ख़तरों को देखते हुए व्यापारिक जहाज़ों में सशस्त्र रक्षकों को तैनात करने की योजना बनाई जा रही है.

उनका कहना था इस बारे में एक मसौदा तैयार कर लिया गया है और इस पर फ़ैसला लेने के लिए ये मसौदा सरकार को भेज दिया गया है.

इससे पहले व्यापारिक जहाज़ों में हथियार ले जाने की इजाज़त नहीं थी क्योंकि उनकी अपनी अलग समस्याएँ होती थीं.

अग्निहोत्री की माने तो सरकार की मुहर लगना तय है, बस देखना है कि ये फ़ैसला कब आता है.

उन्होंने कहा, "चावल चूल्हे पर चढ़ा है. हम बार-बार खोलकर नहीं देखेंगे कि क्या हो रहा है. जब सीटी बजेगी कुकर की,तब खोलेंगे."

अग्निहोत्री बताते हैं कि कई व्यवसायी जहाज़ों में सशस्त्र रक्षकों के आने का विरोध करते रहे हैं लेकिन अब उन्हें भी एहसास है कि ये व्यवस्था अस्थायी रूप से अनिवार्य है.

अग्निहोत्री ने कहा कि कस्टम क़ानून के अंतर्गत अभी एक व्यवस्था है जिसमें अगर किसी विदेशी जहाज़ में हथियार हैं तो जहाज़ के कर्मचारियों को स्थानीय अधिकारियों को सूचित करना होता है.

मतभेद

उन्होंने कहा, "भारतीय जहाज़ो को भी विदेश जाना होता है और अगर उन्हें जहाज़ पर सशस्त्र लोग ले जाने हैं तो एक आधिकारिक व्यवस्था होनी चाहिए.इन सब मामलों को ध्यान में रखते हुए एक मसौदा सरकार को भेजा गया है."

अगर कोई भारतीय जहाज़ हथियारों के साथ विदेशी बंदरगाह पर जाता है तो कर्मचारियों से सबसे पहले यही सवाल पूछा जाता है कि क्या भारतीय क़ानून के अंतर्गत ऐसी व्यवस्था जायज़ है?

अगर भारतीय क़ानून के अंतर्गत ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो विदेशी जहाज़ों के भारत आते वक्त भी इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाएगा.

अग्निहोत्री के मुताबिक वो चाहेंगे कि पूर्व सैनिकों को इस काम के लिए इस्तेमाल किया जाए न कि निजी कंपनियों को गार्ड को.

उन्होंने कहा, "भारत जैसे देश को नॉन-स्टेट ऐक्टर्स से ख़तरा रहा है, इसलिए हम हमेशा चाहेंगे कि पूर्व सैनिकों को ये काम सौंपा जाए."

हमले

पिछले कुछ महीनों में कई देशों के व्यापारिक जहाज़ों पर समुद्री लुटेरों के हमले हुए हैं.

भारतीय नौसेना और तटरक्षक इस बारे में लुटेरों के हमलों से कई जहाज़ों को बचाते रहे हैं लेकिन पिछले महीने की 15 अप्रैल से सात भारतीय अभी भी लुटेरों के कब्ज़े में हैं.

'एस्फ़ाल्ट वेंचर' नाम के एक जहाज़ का अपहरण 28 सितंबर 2010 को हुआ था. महीनों तक चली कोशिशों के बाद लुटेरे 15 अप्रैल को इस जहाज़ को छोड़ने लिए तैयार हो गए.

तय तारीख़ को लुटेरों ने जहाज़ तो छोड़ दिया लेकिन जहाज़ के 15 कर्मचारियों में से केवल आठ को ही छोड़ा गया और बाकी सात को लुटेरों ने अपने पास रख लिया.

भारतीय नौसेना पिछले कुछ समय से आक्रामक रूप से सोमाली जलदस्युओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ कर दी है.

लुटेरों ने सोमालिया की सीमा से बहुत दूर आकर भारतीय समुद्री सीमा के नज़दीक जहाजों पर हमले किए हैं.

भारतीय नौ सेना के युद्ध पोत कई व्यापारी ज़हाजों को अदन की खड़ी में सुरक्षा देते हैं.

चंद रोज़ पहले भारतीय नौसेना ने एक बड़ी कार्रवाई में 60 के ऊपर जल दस्युओं को गिरफ्तार कर लिया था.

संबंधित समाचार