छिपकर भट्टा-परसौल पहुँचे राहुल

राहुल गांधी (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी पुलिस को चकमा देकर कई जगह इसी तरह से जाते रहें हैं.

मायावती सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देकर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार को तड़के ग्रेटर नोएडा के तनावग्रस्त भट्टा-परसौल गांव पहुंचे और वहां के लोगों के दुख दर्द सुने.

पिछले शनिवार को किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष में पांच लोगों की मौत के बाद से प्रशासन ने इलाक़े में धारा 144 लगा रखी है.

सरकार ने राजनीतिक नेताओं के भट्टा-परसौल जाने पर रोक लगा रखी है. इलाक़े में बड़े पैमाने पर पुलिस तैनात है और छानबीन के बाद ही लोगों को जाने दिया जा रहा है.

पुलिस के डर से गांव के ज़्यादातर पुरुष बाहर चले गए हैं. कांग्रेस नेताओं के अनुसार पुलिस को चकमा देने के लिए राहुल गांधी ने अपनी गाड़ी दूर ही छोड़ दी. वह कुछ दूर मोटर साइकिल पर और कुछ दूर पैदल चलकर गाँव पहुंचे.

गांव वालों ने राहुल गांधी से कम मुआवज़े पर जबरन ज़मीन अधिग्रहण के अलावा पुलिस के उत्पीड़न, घरों और खेतों में आग लगाने और लूटपाट की शिकायत की.

इससे पहले पिछले साल अगस्त में भी राहुल गांधी अलीगढ़ के टप्पल गाँव का दौरा किया था. टप्पल में भी भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों और पुलिस में संघर्ष हो गया था.

राहुल के पहुंचने की सूचना पाकर पुलिस अधिकारी पहुंच गए. लेकिन राहुल गांधी गांव में घूम-घूम कर लोगों से मिलते रहे.

दिग्विजय सिंह

राहुल गांधी के दौरे की ख़बर पाकर उत्तर प्रदेश के प्रभारी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी भट्टा-परसौल के लिए दौड पड़े.

बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को इस तरह भेष बदल कर जाना पड़ा क्योंकि सरकार ने पाबंदी लगा रखी है.

दिग्विजय सिंह ने गोलीकांड की न्यायिक जांच की मांग दोहराई.

उन्होंने मुख्यमंत्री मायावती की आलोचना करते हुए कहा कि जनता से चुनी हुई सरकार किसानों से बातचीत के बजाए लाठी और गोली का इस्तेमाल कर रही है.

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को मात्र पांच सौ रूपए प्रति वर्ग मीटर मुआवज़ा दे रही है और वही ज़मीन बिल्डर्स, उद्योगपतियों को देने के लिए गुपचुप तीन हज़ार रूपए प्रति वर्ग मीटर वसूल रही है.

याद दिला दें कि उत्तर प्रदेश सरकार इन आरोपों का खंडन करती है. उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल ऑथारिटी के लिए किसानों की सहमति से ज़मीन ले रही है.

मुख्यमंत्री का आरोप है कि विरोधी दल राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को भड़का रहे हैं.

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