पूरे प्रदेश में फैला किसान आंदोलन

भट्टा गांव में पुलिस कार्रवाई का विरोध करती महिलाएं इमेज कॉपीरइट Reuters

जमीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ ग्रेटर नोएडा के भट्टा-परसौल गाँवों से उठे किसान आंदोलन को विपक्ष ने पूरे उत्तर प्रदेश में फैला दिया है.

राज्य भर में बड़ी संख्या में विपक्षी नेता, किसान और सामाजिक नेता शांति भंग के आरोप में गिरफ़्तार किए गए हैं.

लेकिन मुख्यमंत्री मायावती ने इसे गुंडों बदमाशों और अराजक तत्वों की कार्रवाई बताते हुए किसानों की मांगे मानने और गिरफ़्तार किसानों को रिहा करने से मना कर दिया है.

मायावती ने एक प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'ओछी राजनीति' करने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस पार्टी ने 'निजी कंपनियों के लिए सस्ती दरों पर जमीन अधिग्रहण, किसानों के कथित उत्पीड़न, गोलीकांड की न्यायिक जांच और राहुल गांधी कि गिरफ़्तारी के विरोध में जगह जगह विरोध-प्रदर्शन, धरना और यातायात जाम करने की कोशिश की.

विपक्ष किसानों के साथ

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Image caption गांव वालों ने पुलिस पर ज़्यादतियों का आरोप लगाया है

पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी को लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ विधान सभा के पास धरना देते हुए गिरफ़्तार किया. पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ़्तार करते समय धक्का-मुक्की की.

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी को इलाहाबाद में गिरफ़्तार किया गया.

पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह को उनके संसदीय क्षेत्र गाज़ियाबाद में किसानों की मांगो के समर्थन में अंबेडकर पार्क में धरना देते समय गिरफ़्तार किया गया. उनके साथ अरुण जेटली और मुख़्तार अब्बास नकवी भी गिरफ़्तार किए गए.

उधर रामविलास पासवान भी नोएडा जाते हुए गिरफ़्तार किए गए हैं.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत मुजफ़रनगर में अपने गाँव से भट्टा जाते हुए रास्ते में गिरफ़्तार किये गए.

राकेश टिकैत को अभी मेरठ पुलिस लाइंस में रखा गया है. उनका कहना है कि उनके कई साथी दूसरे रास्ते परसौल पहुँच रहे हैं.

राकेश टिकैत की मानना है कि भट्टा परसौल गाँवों से सुरक्षा बलों को हटाकर किसानों को वापस आने दिया जाए और बातचीत से समस्याएं हल की जाएं.

राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष यास्मिन अबरार ने भट्टा परसौल ग्राम का दौरा कर महिलाओं से मुलाक़ात की. कई महिलाओं ने शिकायत की कि उनके परिवार के लोग गोलीकांड के बाद से लापता हैं. महिलाओं ने ये भी शिकायत की कि पुलिस ने भूसे के ढेर में आग लगाकर कई लोगों को ज़िंदा जला दिया.

यास्मिन अबरार ने इन शिकायतों की जांच पर बल देते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में महिला मुख्यमंत्री होते हुए भी महिलाओं को न्याय नही मिल रहा है.

मायावती का जवाबी वार

उधर मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में एक प्रेसवार्ता में इस आरोप को गलत बताया कि उनकी सरकार ने जेपी उद्योग समूह को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों कि ज़मीनों का सस्ती दरों पर अधिग्रहण किया.

मायावती ने दोहराया कि भट्टा परसौल में आंदोलन का भूमि अधिग्रहण से कोई सम्बन्ध नही है क्योंकि वहाँ किसानों की सहमति से जमीनें ली गयी हैं.

मायावती ने कहा कि विपक्षी दलों ने भट्टा परसौल में हथियारबंद गुंडों के ज़रिए सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाया और गोलियाँ चलवाईं जिसमें काई लोग मारे गए और घायल हुए.

राहुल गांधी के धरने को घिनौना ड्रामा बताते हुए मायावती ने कहा कि किसानों के नाम पर अराजक तत्वों को छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन उनकी सरकार नाजायज मांगे नही मानेगी.

मायावती ने कहा कि भूमि अधिग्रण कानून में संशोधन केंद्र सरकार का कम है और राहुल गांधी को अपने घर में इसकी लड़ाई लड़नी चाहिए.

क़ानून में संशोधन केंद्र की ज़िम्मेदारी

राहुल गांधी पर व्यंग्य करते हुए मायावती ने कहा कि, "उसके अपने घर में इस बेचारे की नहीं चल रही है, इसलिए वह अपना गुस्सा ओछी राजनीति करके ड्रामेबाजी करके निकला रहा है."

मायावती ने ये भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के क्षेत्र रायबरेली में रेल कोच फ़ैक्टरी के लिए जो जमीन ली गयी थी, किसानों को न तो उसका पर्याप्त मुआवजा मिला और न ही लोगों को नौकरियां मिलीं.

मायावती ने सभी विरोधी दलों को शान्ति बनाए रखने की नसीहत दी और कहा कि वे भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए संसद में दबाव बनाएँ.

बहरहाल, मायावती की सलाह अपनी जगह लेकिन विपक्ष ने चारों तरफ से हमला करके मायावती को बचाव की मुद्रा में ला दिया है.

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