'भूमि अधिग्रहण विधेयक मानसून सत्र में'

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Image caption भट्टा परसौल मामले ने भूमि आंदोलन के मामले को फिर से गर्मा दिया है.

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार नए भूमि अधिग्रहण विधेयक को संसद के आने वाले सत्र में पेश कर सकती है.

दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पी चिदंबरम ने कहा, "नए विधेयक में इस बात का प्रावधान है कि एक बार ज़मीन के बड़े हिस्से का अधिग्रहण समझौते के तहत हो जाने के बाद सरकार हस्तक्षेप करके उसका एक हिस्सा ख़ुद अधिग्रहित कर सकती है."

केंद्रीय गृह मंत्री ने इस सिलसिले में कुछ कहने से ये कहते हुए मना कर दिया कि विधेयक को अभी मंत्रीमंडल के सामने पेश किया जाना है.

भूमि अधिग्रहण ओर उससे जुड़ा पुनर्वास का मुद्दा उत्तर प्रदेश में पिछले चंद दिनों से भट्टा परसौल में जारी किसान आंदोलन के बाद फिर से चर्चा में आ गया है और नए क़ानून को लाने में हो रही देरी को लेकर मनमोहन सिंह सरकार पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने गुरूवार के अपने संस्करण में दावा किया था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग्रामीण विकास मंत्री विलास राव देशमुख को कहा था कि वो भूमि अधिग्रहण क़ानून के दोनों संशोधित मसौदों को जल्द से जल्द तैयार कर मंत्रिमंडल के सामने पेश करें.

अख़बार ने प्रधानमंत्री के आदेश को इस पूरे मामले पर पार्टी की राजनीतिक रणनीति के साथ साथ प्रशासनिक सुधार की तरफ़ बढ़ाया गया क़दम बताया है.

मुलाक़ात

विलास राव देशमुख ने गुरुवार को दिल्ली में राष्ट्रीय लोकदल नेता अजीत सिंह से मुलाक़ात की.

अजीत सिंह भट्टा परसौल का दौरा कर चुके हैं. आंदोलन का इलाक़ा भी उनके राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है.

अजीत सिंह से मुलाक़ात के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री विलास राव देशमुख ने कहा, "नए भूमि अधिग्रहण क़ानून का मसौदा पूरी तरह से तैयार है और हमने विभिन्न राजनीतिक दलों और इस क़ानून से प्रभावित होनेवाले लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में मेरी मुलाक़ात अजीत सिंह से हुई. उन्होंने इस मामले में कुछ सुझाव दिए हैं. कुछ नेताओं से मेरी मुलाक़ात 20 मई के लिए तय है. उन लोगों के साथ विचार-विमर्श का दौर दो दिनों तक चलेगा. फिर मसौदे को मंज़ूरी के लिए मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा."

केंद्रीय ग्रामीण मंत्री ने दावा किया कि नया क़ानून किसानों का पक्षधर होगा.

इधर दिल्ली में हुए प्रेस कांफ्रेस में जब पी चिदंबरम से पूछा गया कि क्या नए क़ानून में उस प्रावधान में बदलाव लाया गया है, जिसमें 70 प्रतिशत भूमि ख़रीदने का प्रावधान था यानी जो निजी कंपनियों को करना था और बक़िया 30 प्रतिशत के अधिग्रहण की ज़िम्मेदारी सरकार की थी, इस पर पी चिदंबरम ने कहा कि वो इस बात का जवाब नहीं दे सकते.

उन्होंने सिर्फ़ इतना ही कहा कि इस मामले में एक सहमति बनी है और विधेयक कुछ संशोधनों के साथ संसद में पेश किया जाएगा.

उन्होंने उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल में किसानों और ग्रामीणों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार की कथित 'दमनात्मक' रवैए को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि राज्य सरकार को राजनीतिक दलों की बात सुननी चाहिए.

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले पर नज़र रखी हुई है और ज़रूरत पड़ने पर उचित कारवाई केरगी.

इलज़ाम ग़लत

गृह मंत्री की प्रेस वार्ता मे केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद भी मौजूद थे. उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के इस आरोप पर कि राजनीतिक दले पूरे मामले को उछाल रहे हैं, सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकारों को राजनीतिक मंच से उठाई गई बातों पर ध्यान देना चाहिए.

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Image caption भट्टा परसौल राजनीतिक दलों का तीर्थ स्थल सा बन गया है

सलमान खुर्शीद ने राहुल गाँधी की भट्टा परसौल में हुई गिरफ़्तारी पर भी मायावती को आड़े हाथों लिया.

उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के किसी गाँव मे जाने, वहाँ किसी पीड़ित व्यक्ति के घर रात बिताने से क़ानून-व्यवस्था की दिक़्कत नहीं पैदा हो रही है तो उसे क्यों रोका जाना चाहिए?

इस बीच कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि भट्टा परसौल गाँव में जो राख के ढेर मिले हैं उनमें और खेतों में मानव शरीरी की हड्डियाँ मिली हैं जिससे लगता है कि वहाँ पुलिस की हिंसा में बहुत सारे लोगों की मौत हुई है और मात्र चार लोगों की नहीं जिसका दावा प्रशासन कर रहा है.

दिग्विजय सिंह ने पूरे मामले की न्यायिक जाँच और मृत लोगों के परिवोरों को मुआवज़ा दिए जाने की मांग की है.

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