'ममता की जीत में कांग्रेस की अहम भूमिका'

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Image caption कांग्रेस की ओर से चुनाव का विश्लेषण वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने किया.

कांग्रसे पार्टी ने उत्तर-पूर्वी राज्य असम में मिली जीत को विकास, स्थिरता और उल्फ़ा के साथ शांति समझौते के पक्ष में दिया गया वोट माना तो केरल में मिले जनादेश को उम्मीद से कम बताया है.

पार्टी के मुताबिक़ तमिलनाडु के नतीजे जनता में 'बदलाव की चाह' का नतीजा हैं तो पश्चिम बंगाल में जनता ने वामपंथियों को केंद्र सरकार को गिराने और अस्थिरता फैलाने की सज़ा दी है.

दिल्ली में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सिर्फ़ 13 सालों पहले बनाई गई ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने वामपंथी गठबंधन के 34 सालों के एकछत्र राज का ख़ात्मा कर दिया है.

प्रणव मुर्खजी ने मगर साथ ही ये भी कहा कि तृणमूल की जीत में कांग्रेस की छोटी ही सही लेकिन अहम भूमिका है.

उन्होंने दावा किया कि तृणमूल को आठ फीसदी मतों की जो बढ़त मिली है वो कांग्रेस के वोट हैं.

हालांकि एक सवाल के जवाब में प्रणव मुखर्जी ने साफ़ कहा कि जो लोग वामपंथी दलों की राजनीतिक ख़ात्मे की बात कर रहे हैं वो ये भूल रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी 1984 के चुनावों के बाद दो सीटों पर सिमट गई थी.

उन्होंने कहा, "एक या दो चुनाव में हुई जीत या हार से राजनीतिक भविष्य नहीं तय हो सकता है."

केंद्रीय वित्त मंत्री को जहां वामपंथी दलों के भविष्य पर विश्लेषण से परहेज़ नहीं था वहीं उन्होंने आंध्र प्रदेश के कड़प्पा में हुए उप-चुनाव में कांग्रेस से निष्काषित जगनमोहन रेड्डी और उनकी माँ विजयलक्षमी की जीत पर टिपण्णी करने से साफ़ मना कर दिया.

प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि तमिलनाड़ु में डीएमके के साथ कांग्रेस का गठबंधन जारी रहेगा.

तमिलनाडू

अपनी जीत के बाद प्रेस से बात करते हुए एआईडीएमके नेता जयललिता ने कहा कि वो इस जीत के लिए जनता का शुक्रिया अदा करती हैं और कोशिश करेंगी कि वो जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरें.

जयललिता ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ही ये साफ़ लग रहा था कि जनता डीएमके भ्रष्टाचारी शासन से उब चुकी है.

लेकिन उन्होंने कहा कि वो सरकार बनाने का फ़ैसला तभी करेंगी जब राज्यपाल उन्हें इसके लिए आमंत्रित करेंगे.

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