जगन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले

जगनमोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश के कड़प्पा लोक सभा और पुलिवेंदुला विधान सभा क्षेत्र चुनाव में जगनमोहन रेड्डी ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं.

जगनमोहन की इस जीत से सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए कई गंभीर समस्याओं और चुनौतियों के दरवाज़े खुल सकते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी के बेटे और कांग्रेस से निकाले गए नेता वाई एस जगनमोहन रेड्डी ने आंध्रप्रदेश के चुनावी इतिहास के सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए लगभग पांच लाख तेरह हज़ार वोटों से कड़प्पा लोक सभा सीट जीत ली है.

जगनमोहन ने पहला चुनाव वर्ष 2009 में डेढ़ लाख वोटों से जीता था. वोटों की तादाद के आधार पर देखें तो उनकी ये जीत ना केवल उनकी पहली जीत के मुक़ाबले बल्कि पूरे राज्य में अब तक की सबसे बड़ी जीत है.

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव ने 1991 में नंदयाल लोकसभा चुनाव में लगभग पांच लाख वोटों से जीत हासिल की थी लेकिन इस बार जगनमोहन ने जीत के फ़ासले को और बढ़ा दिया है.

जगनमोहन को कुल छह लाख इकावन हज़ार नौ सौ निनानवे वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के रविंद्र रेड्डी को सिर्फ़ एक लाख 36 हज़ार वोट मिले.

जगनमोहन के सभी प्रतिद्वंदियों की ज़मानत ज़ब्त हो गई है.

बेटे के ही रास्ते पर चलते हुए जगनमोहन की मां विजयलक्ष्मी ने भी पुलिवेंदुला विधानसभा सीट से बड़ी जीत हासिल की है.

राजशेखर रेड्डी की पत्नी विजयलक्ष्मी ने अपने देवर और पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेख़र रेड्डी के भाई विवेकानंद रेड्डी को लगभग 85 हज़ार वोटों से पराजित किया है.

इससे पहले 2009 में उनके पति और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर राजशेख़र रेड्डी ने 68 हज़ार वोटों से जीत हासिल की थी.

जगन और उनकी मां की जीत से ये तो स्पष्ट हो गया है की कड़प्पा की जनता जगनमोहन रेड्डी और विजयलक्ष्मी को ही वाईएसआर का असली वारिस मानती हैं.

'सहानूभूति'

कुछ लोग हालांकि जगन की जीत को वाईएसआर परिवार के लिए सहानुभूति की लहर के परिणाम के रूप में भी देखते हैं.

वाईएसआर की मौत के बाद कांग्रेस नेतृत्व और जगनमोहन रेड्डी के बीच एक टकराव शुरू हुआ था. इस जीत के बाद जगनमोहन ने कड़प्पा ज़िले की हद तक अपनी बढ़त साबित कर दी है.

जगन ने अपना सारा चुनाव अभियान इसी मुद्दे पर चलाया था कि कांग्रेस के नेतृत्व ने उनके परिवार का अपमान किया है और उनके परिवार में फूट डालने की कोशिश की है.

कांग्रेस के लिए यह हार इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ख़ुद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी, कई मंत्रियों और फ़िल्म अभिनेता चिरंजीवी ने जगनमोहन के ख़िलाफ़ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.

चिरंजीवी कुछ महीनों पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

अब जगन का ध्यान अपने राजनीतिक दल वाईएसआर कांग्रेस को मज़बूत बनाने पर केंद्रित रहेगा. उन्हें अभी ये सिद्ध करना है कि उनका प्रभाव केवल कड़प्पा तक ही सीमित नहीं है.

राज्य कांग्रेस में कई ऐसे विधायक हैं जो अबतक जगन और कांग्रेस पार्टी के बीच में किसको चुनें उसको लेकर उहापोह की स्थिति में हैं. उन्हें इस मामले पर फिर से सोचना होगा.

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