'बंगाल में हार लोकतंत्र का फैसला': वामपंथ

सीपीएम लोगो
Image caption इस हार के बाद पश्चिम बंगाल में वामपंथी गठबंधन का 34 सालों का शासन ख़त्म हो गया है.

वामपंथी गठबंधन के सबसे बड़े धटक माकर्सवादी कांग्रेस पार्टी यानि सीपीएम ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की हार को 'लोकतंत्र का फै़सला' और केरल के नतीजों को दक्षिणी राज्य के चुनाव इतिहास का 'नया आयाम' बताया है.

केरल में पिछले बहुत सालों से किसी एक गठबंधन को भारी बहुमत मिलता रहा है. लेकिन इस बार वहाँ वामपंथी एलडीएफ़ गठबंधन और कांग्रेस गठबंधने के बीच चंद सीटों का ही अंतर है.

पार्टी ने दोनों राज्यों में विपक्ष में बैठने का निर्णय किया है.

हालांकि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और सीपीएम से निष्काषित नेता सोमनाथ चर्टजी ने कहा कि सीपीएम को इससे सबक़ मिलेगी और उन्हें सुधार करने चाहिए. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी को भी इस हार के लिए ज़िम्मेदार नहीं माना. उन्होंने कहा कि वो बहुत दुखी हैं.

पोलितब्यूरो

दिल्ली में चनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी नेता सीताराम येचूरी ने कहा कि चुनाव के नतीजों पर चर्चा के लिए सोमवार को पार्टी के पोलितब्यूरो की एक बैठक आयोजित की गई है.

सीताराम येचूरी ने कहा कि इसमें हार के कारणों और पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी.

अन्य दो राज्यों - असम और तमिलनाडू के नतीजों की समीक्षा करते हुए सीपीएम नेता ने कहा कि असम में विपक्षी दलों के बीच की फूट कांग्रेस की हार की एक बहुत बड़ी वजह रही है.

Image caption कुछ सीपीएम महासचिव प्रकाश कराट को पार्टी की बिगड़ी राजनीतिक स्थिति के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं.

मगर साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की चरमपंथी संगठन उल्फ़ा के साथ बातचीत और शांति की कोशिश को भी जनता ने सकारात्मक रूप में देखा है.

उन्होंने तमिलनाडू में डीएमके की हार को भ्रष्ट्राचार के ख़िलाफ़ जनता का ग़ुस्सा बताया.

उनका कहना था कि ये भ्रष्टाचार डीएमके के अकेले का नहीं बल्कि केंद्र भी उसके लिए उतना ही ज़िम्मेदार है.

हिंसा

बार-बार पूछे जाने पर भी सीपीएम नेता सीधे तौर पर नहीं कह रहे हैं कि इस हार के लिए वो किसको ज़िम्मेदार मानते हैं.

पोलितब्यूरो नेता वृंदा कराट ने कहा कि पिछले 34 सालों से पश्चिम बंगाल में वामपंथी गठबंधन की सरकार थी और जनता एक बदलाव चाहती थी. हालांकि ये गठबंधन के लिए एक बड़ी हार है लेकिन वो इस मामले पर पूरी चर्चा पार्टी की बैठक में करेगी.

एक टीवी चैनल से बातचीत में पार्टी नेता निलोतपल बसू ने कहा कि उनका दल जनता के साथ काम करेगा और ये जानने की कोशिश करेगा कि आख़िर उनकी कौन सी बात पसंद नहीं की गई.

निलोतपल बसू ने इस बात से सीधी तरह से इंकार किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से हिंसा की शुरूआत की जा सकती है.

सीपीआई नेता अतुल अंजान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शांति स्थापित करने की ज़िम्मेदारी दोनों मुख्य दलों की है इसीलिए इसे सिर्फ़ वामपंथी गठबंधन के माथे नहीं मढ़ा जाना चाहिए.

Image caption सोमनाथ चर्टजी को कराट से मतभेदों के कारण पार्टी से निकाला गया था.

निलोतपल बसू का कहना था कि लोगों को इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए कि पिछले ढेढ़ सालों के भीतर 300 से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं.

सोमनाथ

सोमनाथ चर्टजी ने कहा कि एक चुनाव में हुई हार को किसी पार्टी का ख़ात्मा समझ लेना ग़लत होगा.

उन्होनें इस मामले में मीडिया को आड़े हाथों लिया और कहा कि उसने 2001 और 2006 में भी पश्चिम बंगाल में वामपंथ के अंत का दावा किया था.

इस सवाल पर कि क्या पार्टी से उनके निकाले जाने का कोई असर चुनाव पर हुआ होगा उन्होंने कहा कि वो ख़ुद को इतना बड़ा नेता नहीं मानते कि उनके निष्काषण का असर चुनावों पर होगा.

लेकिन उनका कहना था कि ममता बनर्जी की राजनीति के कारण वो पश्चिम बंगाल के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

संबंधित समाचार