कर्नाटक में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

कर्नाटक विधान सभा
Image caption विधानसभा में इस मामले को लेकर भारी राजनीतिक उथल पुथल मची थी

दक्षिणी राज्य कर्नाटक में राजनीतिक गतिविधियाँ एकाएक तेज़ हो गई हैं जो भारतीय जनता पार्टी की बीएस येदुरप्पा सरकार के लिए मुश्किलों का सबब बन सकती हैं.

उच्चतम न्यायालय के शुक्रवार के अपने एक फैसले में येदुरप्पा की जगह दूसरे मुख्यमंत्री की मांग कर रहे विधायकों के गुट को फिर से बल मिला है.

न्यायालय ने राज्य के 16 विधायकों के निलंबन पर रोक लगा दी है जिन्हें विधान सभा अध्यक्ष ने पिछले साल अक्तूबर में अयोग्य क़रार दे दिया था.

इस बीच राज्यपाल एचआर भारद्वाज दिल्ली पहुँचे हैं.

एचआर भारद्वाज पिछली मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय क़ानून मंत्री थे. वो कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता रहे हैं.

राज्यपाल ने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का अध्ययन करेंगे.

राज्य की बीजेपी हुकुमत और राज्यपाल के संबंध बहुत बेहतर नहीं बताए जाते हैं. राज्य सरकार उनपर पक्षपात का आरोप लगाती रही है.

आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उन 16 विधायकों के निलंबन को निरस्त कर दिया है जिन्हें कर्नाटक विधान सभा अध्यक्ष ने पिछले साल अक्तुबर में हुए विश्वास मत के दौरान अयोग्य क़रार दिया था.

इनमें 11 बीजेपी और पाँच स्वतंत्र विधायक शामिल थे.

मुख्यमंत्री का कहना है कि वो अदालत के आदेश का आदर करते हैं.

निलंबित किए गए एक विधायक बालाचंद्रन जरकीवाडे ने अदलात के फैसले के बाद कहा, "विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने हमें ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से निलंबित कर दिया था. लेकिन हमें न्यायालय पर भरोसा था. उसने हमारे निलंबन पर रोक लगा थी."

वो सोमवार से शुरू हो रही विधानसभा की कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं.

इन लोगों को विश्वास मत के पहले ही दल-बदल क़ानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था. इनके निलंबन के बाद बी एस येदुरप्पा की सरकार बहुत ही मामूली मतों से विश्वास प्रस्ताव जीत गई थी.

निलंबन के बाद विधायकों ने हाईकोर्ट में अपील की थी. हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराया था.

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