किसान नेता टिकैत का निधन

फाइल फोटो
Image caption पिछले दिनो नोएडा के पास के गांवो में किसान आंदोलन को भी टिकैत ने समर्थन दिया था.

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत का रविवार सुबह मुज़फ्फरनगर में निधन हो गया.

वो 76 वर्ष के थे और पिछले कई महीनों से आंत के कैंसर से पीड़ित थे.

टिकैत के परिवार वालों ने बीबीसी को बताया कि उनका अंतिम संस्कार सोमवार सुबह 11 बजे उनके पैतृक गांव सिसौली में होगा.

टिकैत अपने पीछे चार बेटे और दो बेटियां छोड़ गए हैं. उनके पुत्र राकेश टिकैत उनके साथ किसान यूनियन का काम देखा करते थे.

अभियान

टिकैत पिछले क़रीब 25 सालों से किसानों की समस्याओं के लिए संघर्षरत थे और विशेष कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट किसानों में उनकी साख थी.

टिकैत ने दिसंबर 1986 में ट्यूबवेल की बिजली दरों को बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ मुज़फ्फरनगर के शामली से एक बड़ा आंदोलन शुरु किया था.

इसी आंदोलन के दौरान एक मार्च 1987 को किसानों के एक विशाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस गोलीबारी में दो किसान और पीएसी का एक जवान मारा गया था.

इस घटना के बाद टिकैत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए. उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह ने टिकैत की ताकत को पहचाना और खुद सिसौली गांव जाकर किसानों की पंचायत को संबोधित किया और राहत दी.

इसके बाद से ही टिकैत पूरे देश में घूम घूमकर किसानों के लिए काम किया. उन्होंने अपने आंदोलन को राजनीति से बिल्कुल अलग रखा और कई बार राजधानी दिल्ली में आकर भी धरने प्रदर्शन किए.

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