ख़त्म नहीं हुआ है साम्यवाद: करात

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में भले ही वामदलों को हार का सामना करना पड़ा है पर भारत से साम्यवाद ख़त्म नहीं हुआ है. पार्टी महासचिव प्रकाश ने बताया है कि हार के कारणों की एक महीने के अंदर समीक्षा की जाएगी.

पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में वामदलों की ऐतिहासिक हार के बाद मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की पहली पत्रकार वार्ता सोमवार को दिल्ली में हुई. इससे पहले दिल्ली में पार्टी की पोलित ब्यूरो की बैठक भी थी.

लिहाज़ा पत्रकारों के पास तरह-तरह के सवालों का पिटारा था. एक सवाल सबने पूछा कि आख़िर बंगाल में वामदलों की मिली करार हार पर पोलित ब्यूरो में क्या प्रतिक्रिया रही. प्रकाश करात ने इस ज़ाहिर से सवाल का रटा-रटाया, औपचारिक सा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों की पूर्ण समीक्षा होगी, उसके बाद ही पता चलेगा.

पिछले लोक सभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद हमने कई कदम उठाए थे. इससे हमें मिलने वाले मतों में 11 लाख की वृद्धि हुई है. लेकिन हमने ये नहीं देखा की विपक्ष भी तो अपने मतदाताओं को जुटा रहा है. उनके मतों में 34 लाख की बढ़ोतरी हुई है. हमारा आकलन ग़लत साबित हुआ.

प्रकाश करात

प्रकाश करात का कहना था, "एक महीने के अंदर समीक्षा की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. निचले स्तर पर बैठके होंगी, प्रदेश स्तर पर बैठक होगी, फिर रिपोर्ट केंद्रीय समिति को भेजी जाएगी. हम ग़ौर करेंगे कि क्यों लोग हमसे अलग-थलग हो गए. वैसे भी हमारे लिए राजनीति न तो चुनावों से शुरु होती है और न वहाँ ख़त्म हो जाती है."

लेकिन पत्रकार उनके इस जवाब से संतुष्ट नज़र नहीं आए. बंगाल में हार के कारणों के सवाल का सीधा-सीधा जवाब देने से पहले तो करात बचते रहे, लेकिन बार-बार पूछे जाने पर प्रकाश करात वामदलों की हार का ये तर्क लेकर आए.

उन्होंने कहा, "पिछले लोक सभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद हमने कई कदम उठाए थे. इससे हमें मिलने वाले मतों में 11 लाख की वृद्धि हुई है. लेकिन हमने ये नहीं देखा की विपक्ष भी तो अपने मतदाताओं को जुटा रहा है. उनके मतों में 34 लाख की बढ़ोतरी हुई है. हमारा आकलन ग़लत साबित हुआ."

सिमटता वामपंथ?

बुद्धदेव भट्टाचार्य पोलित ब्यूरो की बैठक में शामिल नहीं हुए थे. प्रकाश करात ने कहा कि हार के बाद किसी नेता ने पार्दी पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया है और इस बारे में ग़लत ख़बरें फैलाई जा रही हैं.

सवालों से घिरी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी चुनावी हार के मुद्दा के बजाए बंगाल में चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा ज़्यादा उठाती हुई नज़र आई. प्रकाश करात ने कहा है कि बंगाल में चुनाव के बाद वामदलों के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ व्यापक पैमाने पर हिंसा हो रही है. केरल में कम अंतर से हुई करात का कहना ये था कि लोगों ने मौटे तौर पर लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट की नीतियों का समर्थन किया है.

कभी बंगाल में एकछत्र राज करने वाले वामदलों का आज वहाँ से दबदबा ख़त्म हो गया है. केरल ने लोगों ने भी सत्ता उनके हाथों से छीन ली है. केवल छोटे से राज्य त्रिपुरा में वामदलों का राज कायम है. यानी राज्य स्तर पर भले ही वामदल बेदम नज़र आ रहे हैं. लेकिन सीपीएम नेता प्रकाश करात ने बड़े दमखम से सबको आगाह करते हुए कहा है कि साम्यवाद का अंत नहीं हुआ है.

लेकिन दमखम के इन दावों की असली परीक्षा अगले चुनावी दंगल में होगी. नतीजों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए हैदराबाद में 11 और 12 जून को पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक होगी.

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