जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा

माओवादी
Image caption माओवादियों का कहना है कि उन्होंने वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ वोट दिया है

माओवादियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने मार्क्सवादियों की 34 सालों से चल रही "सामजिक फासीवादी" सरकार के ख़िलाफ़ वोट दिया है.

संगठन का कहना है कि सीपीएम को अपनी "कॉरपोरेट अनुकूल" और "जन विरोधी" नीतियों की वजह से ही हार का सामना करना पड़ा है.

बीबीसी से बात करते हुए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेता गुड्सा उसेंडी का कहना है कि सीपीएम को इतनी बड़ी हार सिर्फ़ उनके नीतिगत दिवालिएपन की वजह से मिली है.

उसेंडी ने कहा, "माओवादियों ने सीपीएम की नीतियों का विरोध किया था. अब आगे चलकर देखना है कि ममता बनर्जी क्या करती हैं. अगर वह भी उन्ही नीतियों पर चलती हैं तो हम उनका भी विरोध करेंगे."

आरोप

उसेंडी ने उन आरोपों को ग़लत बताया कि माओवादियों ने तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर सीपीएम को पश्चिम बंगाल के विधानसभा के चुनाव में हराने का काम किया है या फिर ममता बनर्जी का साथ दिया है.

उसेंडी कहते हैं, "ममता भी उन्ही वर्गों की प्रतिनिधि हैं, जो भी शासक वर्गीय राजनितिक पार्टियाँ हैं जैसे कि सीपीएम, भाजपा, कांग्रेस. उसी वर्ग की प्रतिनिधि ममता भी हैं."

माओवादी मानते हैं कि ममता के शासनकाल में भी कुछ ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ने वाला है.

उसेंडी कहते हैं कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि ममता बनर्जी भी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए की नीतियों का अनुसरण करेंगी.

वादा

उन्होंने कहा, "पिछले साल हमारी पार्टी के महासचिव गणपति ने भी कहा था कि ममता के सत्ता में आने से कोई फ़र्क नहीं होगा."

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Image caption ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को भारी बहुमत मिला है

वैसे माओवादियों का कहना है कि हालाँकि उन्हें ममता से कोई ख़ास उम्मीद नहीं है लेकिन वह इस पर नज़र ज़रूर रखेंगे कि वे चुनाव से पहले किए गए वादे निभातीं हैं या नहीं.

उसेंडी ने कहा- उम्मीद तो नहीं है लेकिन हम देखेंगे कि चुनाव से पहले उन्होंने जो वादे किए थे जैसे जेलों में बंद राजनीतिक बंदी जैसे. देखा जाएगा. पश्चिम बंगाल की जनता देखेगी कि वह अपने वादों पर कितना खरी उतरती हैं.

पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने शानदार सफलता हासिल की है.

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