भारत का 'मोस्ट वांटेड' ठाणे में

वज़हुल का घर इमेज कॉपीरइट BBC World Service

भारत ने पिछले दिनों पाकिस्तान को 50 मोस्ट वांटेड लोगों की सूची सौंपी थी. लेकिन अब ये बात सामने आ रही है कि उस सूची में से एक व्यक्ति मुंबई से लगे ठाणे ज़िले में ही रह रहा है.

अगर इस सूची की मानें तो वज़हुल क़मर ख़ान को पाकिस्तान में होना था. इस ख़बर से भारतीय एजेंसियों और सरकार को काफ़ी शर्मिंदगी हुई है.

वज़हुल क़मर ख़ान का परिवार डरा हुआ है. जबसे एक अंग्रेज़ी अख़बार में ये ख़बर छपी है कि उनका नाम मोस्ट वांटेड में है, लेकिन वो ठाणे में ही रहते हैं, मीडिया के लोगों की घर के बाहर भीड़ लगी हुई है.

ठाणे के वागले इस्टेट इलाक़े में एक मंदिर से लगी एक संकरी गली में घुसते ही बाएँ तरफ़ लोहे की सीढ़ी चढ़कर उनका घर पड़ता है.

सीढ़ी इतनी ख़तरनाक कि दो बार गिरते-गिरते मैं बचा. पता चला कि वज़हुल घर में नहीं हैं. पत्नी यास्मीन और पाँचों बच्चे मीडिया के लोगों से चले जाने को कह रहे थे. घर में रहने वालों में वज़हुल की बूढ़ी मां भी शामिल हैं.

'जवाब नहीं'

घर की ठीक नीचे वज़हुल किराए पर अंडे की एक दुकान चलाते हैं. बगल में उनके बहनोई की फ़र्नीचर की दुकान है. वो भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए.

अगल-बगल वालों ने बताया कि परिवार डरा हुआ है. ये घर स्थानीय वागले इस्टेट पुलिस थाने से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है.

थाने में किसी के पास कोई जवाब नहीं है कि वज़हुल का नाम मोस्ट-वांटेड की सूची में कैसे आ गया. ठाणे के कमिश्नर केपी रघुवंशी ने बताया कि उन्हें इस सूची के बारे में कुछ पता नहीं है.

हमारी बात वज़हुल से तो नहीं हो पाई, लेकिन एक अख़बार से बातचीत में उन्होंने कहा कि वो कभी पाकिस्तान नहीं गए हैं.

वज़हुल को 2003 के मुंबई में हुए धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था. ये धमाके मुलुंड, विले पार्ले और मुंबई सेंट्रल में हुए थे. पुलिस के मुताबिक़ वो धमाकों की साज़िश में कथित तौर पर शामिल थे.

वज़हुल कहते हैं कि वो लगतार अदालतों की कार्यवाही में हिस्सा ले रहे हैं.

ज़मानत

वज़हुल ने अख़बार को बताया कि वो 2003 से 2004 के बीच उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छुपते फिरे, फिर धारावी में ज़री का कारोबार शुरू किया, लेकिन 2010 में उन्हें एटीएस की टीम ने गिरफ़्तार कर लिया और उनके खिलाफ़ अवैध हथियार लेकर चलने के सिलसिले में मुक़दमा दर्ज कर लिया, लेकिन बाद में उन्हें सभी मामलों में ज़मानत पर छोड़ दिया गया.

उधर इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "मान लीजिए हम एक नाम को लेकर ग़लत हुए, लेकिन 49 नामों को लेकर तो सही थे. इसे कोई बड़ा मुद्दा बनाने की ज़रूरत नहीं है. हो सकता है कि ग़लती हुई हो या फिर दो लोगों के एक ही नाम हों, मुझे पता नहीं. मुझे जाँच करनी होगी."

उधर राज्य सरकार की ओर से अभी इस मामले में कोई बात सामने नहीं आई है कि ग़लती किसकी थी और वज़हुल का नाम इस सूची में कैसे आ गया.

वज़हुल ने अख़बार को बताया कि वो चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई पर ध्यान लगाएँ और वो उनके लिए हर संभव प्रयास करेंगे.

दबाव

पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने के लिए भारत ने 50 वांछित भगोड़ों की एक सूची जारी की थी जिसमें लश्कर के संस्थापक हाफ़िज़ सईद और दाऊद इब्राहिम के भी नाम हैं.

Image caption हाफ़िज़ सईद का नाम भी इस सूची में है

इसके अलावा सूची में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर का भी नाम है जिन पर 2001 में संसद पर हमले की साज़िश रचने का आरोप है.

सूची में अल क़ायदा के इलियास कश्मीरी, दाऊद के सहयोगी टाइगर मेमन, छोटा शकील, मेमन अयूब अब्दुल रज्जाक, अनीश इब्राहिम कास्कर, अनवर अहमद हाजी जमाल और मोहम्मद अहमद डोसा के नाम हैं. कश्मीरी के अलावा इन सभी लोगों पर 1993 में मुंबई में धमाके करवाने का आरोप है.

इस सूची में हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के संस्थापक अमानुल्ला ख़ान, पंजाब के चरमपंथी लखबीर सिंह, परमजीत सिंह पंजवार, रंजीत सिंह उर्फ नीता और वाधवा सिंह के नाम शामिल हैं.

भारत सरकार ने ये सूची ऐसे समय में जारी की जब पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना हुआ है.

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