क्या राहुल गांधी सही कह रहे हैं?

भट्टा-पारसौल में लगी आग (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption भट्टा पारसौल में किसानों के साथ हुई झड़प के बाद पुलिस के जवानों में गाँव में कई जगह आग लगा दी थी

ग्रेटर नोएडा के भट्टा-पारसौल गाँव में महिलाओं के साथ बलात्कार और राख के ढेर में लाशें दबी होने के आरोप लगाकर काँग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी.

लेकिन अब काँग्रेस ने इस हंगामे के लिए मीडिया को दोषी ठहराया है.

काँग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने इस बात से इनकार किया है कि राहुल गांधी ने भट्टा गाँव में 74 लोगों के मारे जाने की बात कही.

उन्होंने महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार की भी बात कही थी लेकिन गांव में महिलाएँ ये तो कहती हैं कि पुलिस वालों ने मारा पीटा और गालियाँ दीं लेकिन कहने को कोई तैयार नहीं है कि किसी के साथ यौन दुर्व्यवहार हुआ.

भट्टा-पारसौल में सात मई को हुए गोलीकांड के दस दिन बाद भी ये कहना मुश्किल है कि दरअसल कितने लोग यहाँ मारे गए थे.

उत्तर प्रदेश सरकार कहती है कि दो पुलिस वाले और तीन आम लोग मारे गए थे.

कितने लोग मारे गए?

गाँव के लोगों से लंबी बातचीत के बाद भी इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं मिलते कि गोलीकांड में दो लोगों के अलावा और भी लोगों की मौत हुई है.

मरने वालों में एक राजपाल के भाई श्रीपाल कहते हैं कि गाँव के चार साढ़े चार सौ लोग भागे हुए हैं और जब तक वो सब लौट कर नहीं आ जाते ये कहना मुश्किल है कि कितने लोग मारे गए थे.

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Image caption पुलिस की कार्रवाई के बाद भट्टा गाँव के सारे पुरुष गाँव छोड़कर चले गए थे और अधिकांश अभी भी वापस नहीं लौटे हैं

लेकिन भट्टा के सरपंच ने बहुत साफ़ साफ़ शब्दों में बताया कि उनके गाँव से राजपाल नाम का सिर्फ़ एक आदमी मारा गया है.

श्रीपाल ने कहा, “सात मई को धरने में शामिल होने के लिए लगभग दस गाँवों के लोग आए थे. उनके अलावा खेतों में काम करने बाहर से आए लोग भी जमा थे.”

ऐसे में अगर ज़्यादा लोग मारे गए हों और उनकी लाशें ठिकाने लगा दी गई हों तो भी ठीक ठीक कुछ पता लगाना मुश्किल है.

भट्टा गाँव में जगह जगह पर राख के काले काले ढेर दूर से ही दिखाई पड़ते हैं.

ये गोबर के कंडों के ढेर हैं जिन्हें 7 मई की शाम पुलिस और पीएसी वालों ने आग के हवाले कर दिया था.

राख कुरेदने पर अंदर कुछ भारी ढेले नुमा चीज़ें निकल नज़र आती हैं – जैसे कोई ठोस चीज़ भयंकर ताप में पिघलकर फिर से पत्थर की तरह जम गई हो.

अटकलें लगाई जा रही हैं कि ये उन लोगों की हड्डियाँ है जिन्हें पुलिस कार्रवाई के दौरान आग मे फेंक दिया गया था.

ये अटकलें किसी वैज्ञानिक जाँच के आधार पर नहीं लगाई जा रही हैं.

यौन दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं

राहुल गांधी ने गाँव से लौटने के बाद कहा था कि वहाँ महिलाओं से बलात्कार किया गया है.

गाँव की महिलाएँ ये शिकायत तो करती हैं कि पुलिस वालों ने उनको बुरी तरह मारा पीटा और अश्लील गालियाँ दीं लेकिन यौन दुर्व्यवहार की बात कहने को कोई तैयार नहीं है.

लगभग चालीस साल की पिंकी, ग्यारहवी कक्षा की छात्रा नेहा शर्मा और मुन्नी आदि महिलाओं के बयानों में एक बात बार बार आई.

उन्होंने कहा कि पीएसी वालों ने बच्चियों, बूढ़ियों, विवाहित और अविवाहित औरतों को बहुत बुरी तरह मारा और 'भद्दी भद्दी गालियाँ दीं'.

लेकिन कोई भी ये कहने को तैयार नहीं है कि महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया हो.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती जो भी कहें लेकिन किसानों में इस बात को लेकर ज़बरदस्त ग़ुस्सा है कि उनकी संपत्ति सरकार ने जबरन ले ली और इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के बदले उन्हें गोली और लाठी खानी पड़ी.

एक बुज़ुर्ग किसान पाली ने बताया कि उनकी 16 बीघा ज़मीन थी जिसे सरकार ने अधिग्रहीत कर लिया. बदले में उन्हें एक करोड़ रुपए मिले.

लेकिन वो कहते हैं, “एक करोड़ तो लड़कियों की शादी, क़र्ज़ चुकता करने और ऐसे ही दूसरे कामों में ख़र्च हो जाएगा. उसके बाद क्या करेंगे? भीख माँगेंगे या चोरी छीनाझपटी करेंगे.”

ज़ख़्मी हाथ लिए अपने घर के बाहर बैठी नेहा शर्मा कहती हैं सरकारी मुआवज़े से उनकी तकलीफ़ें कम नहीं होने वाली.

उन्होंने कहा कि उनकी चार बहनें हैं और एक भाई है. भाई की नौकरी नहीं लगी है. दो बहनें अभी कुँवारी हैं.

“चार छह बीघा ज़मीन के मुआवज़े से ये सब कैसे होगा? हम किस बात से ख़ुश हो?”, नेहा शर्मा ने कहा.

काँग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने छापामार तरीक़े से भट्टा-पारसौल पहुँचकर भले ही अख़बारों और टेलीविज़न की सुर्ख़ियाँ बटोर ली हों, लेकिन गाँव के लोग इस बात से बेख़बर नहीं हैं कि केंद्र में काँग्रेस की ही सरकार है और किसानों को ज़मीन से बेदख़ल करने की नीति केंद्र सरकार की है.

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