सोनिया और मायावती आमने-सामने

मायावती
Image caption शशांक शेखर ने मायावती का बयान पढ़कर सुनाया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बीच पिछले पांच सालों से चल रहा ‘प्यार और घृणा’ का लुका छिपा खेल ख़त्म हो गया लगता है.

उत्तर प्रदेश की सत्ता पर अगले साल काबिज होने के लिए बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बीच खुल्लमखुल्ला जंग शुरू हो गया है.

कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की नेता सोनिया गांधी ने वाराणसी में जनसभा करके उत्तर प्रदेश में कुशासन, किसानों पर बर्बर अत्याचार, लूट खसोट, अंधेरगर्दी और अन्याय का बोलबाला होने का आरोप लगाया.

सोनिया का माया सरकार पर 'हल्ला बोल'

वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं को अपने गिरहबान में झाँकने, झूठ और अफवाहें न फैलाने और वाणी पर संयम रखने की सलाह दी.

'संयम रखें राहुल गांधी'

सोनिया गांधी ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा था कि राज्य में अंधेरगर्दी है और जनता को पूछने वाला कोई नहीं.

ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल गाँव में हुई हिंसा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "गौतम बुद्ध नगर ज़िले में किसानों के साथ जो बर्बरता हुई है, उससे हम शर्मिंदा हैं. उत्तर प्रदेश सरकार सिर्फ़ किसानों की ज़मीन हड़पना चाहती है. ये किसानों की लूट की साज़िश है."

लेकिन मुख्यमंत्री मायावती की ओर से मोर्चा संभाल रहे कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पत्रकारों को बताया कि ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल में सात मई को हुए हिंसक संघर्ष में केवल चार लोग मारे गए हैं, न कि 74 जैसा कि राहुल गांधी के हवाले से अख़बारों ने लिखा.

शेखर ने बताया कि घटनास्थल से ली गई राख की फ़ॉरेंसिक जाँच में मानव अवशेष नहीं पाए गए हैं. जो विस्फोटक पाए गए हैं, उनकी रिपोर्ट तीन-चार दिनों में मिल जाएगी. उन्होंने महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया.

शशांक शेखर ने दोहराया कि भट्टा-परसौल में भूमि अधिग्रहण का मसला नही है. विपक्ष में असामाजिक तत्वों और गुंडों बदमाशों को भड़काकर इस घटना को अंजाम दिया.

आरोप

पिछले दिनों किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने के बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भट्टा परसौल में कई लोगों के मारे जाने का आरोप लगाया था और ये भी कहा था कि वहाँ की महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ है.

मुख्यमंत्री मायावती का हवाला देते हुए उन्होंने राहुल गांधी को वाणी पर संयम रखने की सलाह दी ताकि बाद में सफ़ाई देने की नौबत न आए.

शेखर के अनुसार मुख्यमंत्री मायावती ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष के नेता ‘ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानबाज़ी न करके अपनी वाणी पर संयम रखें, जिससे सफ़ाई देने की नौबत न आए.’

मायावती के ओर से पढे गए बयान में कहा गया है कि अगर कांग्रेस पार्टी सभी वर्गों का ध्यान रखती, तो बसपा के गठन की नौबत न आती.

कार्रवाई

दरअसल वाराणसी में सोनिया गांधी ने कहा था कि उन्होंने कहा कि किसी ज़मान में उत्तर प्रदेश सेवा और त्याग के साथ-साथ देश को नेतृत्व देने के लिए जाना जाता था, लेकिन अब ये सब बातें पुरानी हो गई हैं और अब यहाँ सिर्फ़ लूट है.

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Image caption सोनिया ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश को दी गई सहायता राशि का भी हवाला दिया था.

लेकिन मायावती के बयान में आरोप लागया गया है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को संविधान के अनुसार निर्धारित धनराशि भी नही दे रही है.

परिवारवाद के आरोप का जवाब देते हुए मायावती ने कहा कि कांशीराम के समय से ही उन्होंने अपने परिवार के लोगों को राजनीति से दूर रखा है.

क़ानून-व्यवस्था और अपराधों पर काबू न पाने के आरोपों का जवाब देते हुए मायावती ने कहा कि उनकी सरकार ने क़ानून तोड़ने वाले अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों को भी सज़ा दिलवाई.

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