अमर सिंह के खिलाफ़ जांच के आदेश

अमर सिंह
Image caption अमर सिंह राज्य सभा के सांसद हैं

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारत के प्रवर्तन निदेशालय को समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव और सांसद अमर सिंह के खिलाफ़ पैसों के कथित हेरफेर के एक मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

शुक्रवार को उच्च न्यायालय के दो जजों की पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय कि ये जांच दो सप्ताह में शुरू हो जानी चाहिए.

न्यायालय ने अमर सिंह की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमे उन्होंने अपने खिलाफ़ कानपुर के बाबूपुरवा थाने में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था.

न्यायमूर्ति इम्तियाज़ मुर्तज़ा और न्यायमूर्ति एसएस तिवारी की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को जांच दो सप्ताह के अंदर शुरू करने और जांच शुरू होने के एक माह के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया है.

आरोप

उत्तर प्रदेश में कानपुर शहर के एक व्यापारी शिवकांत त्रिपाठी ने 2007 में अमर सिंह के खिलाफ़ आरोप लगाए थे कि उन्होंने उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते हुए 500 करोड़ रूपये से ज्यादा की कथित हेरफेर की थी.

15 अक्टूबर 2007 को अमर सिंह के खिलाफ़ कानपुर में हवाला प्रणाली से पैसों के हेरफेर का मामला दर्ज हुआ था.

इसी मामले में अपनी गिरफ़्तारी पर रोक लगाने और एफ़आईआर को रद्द करने के लिए अमर सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मामले को उठाया था.

अमर सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि ये मामला राजनीति से प्रेरित है.

अमर सिंह का कहना था कि उन्हें हवाला के कथित आरोप में फंसाया जा रहा है और वे निर्दोष हैं.

लेकिन उच्च न्यायालय ने अमर सिंह की दलील को ख़ारिज कर दिया कि मामला राजनीती से प्रेरित है और प्रवर्तन निदेशालय को जांच के आदेश दे दिए हैं.

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