कनिमोड़ी को ज़मानत नहीं, जेल भेजी गईं

कनिमोड़ी

कनिमोड़ी डीएमके प्रमुख और तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की पुत्री और राज्य सभा सांसद हैं.

दिल्ली के पटियाला हाउस स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2-जी घोटाले में सह-अभियुक्त कनिमोड़ी की ज़मानत याचिका को ख़ारिज कर दिया और फिर उन्हें गिरफ़्तार कर न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया.

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि की पुत्री और राज्य सभा सांसद कनिमोड़ी शुक्रवार को लगातार कोर्ट परिसर में मौजूद थीं और इस फ़ैसले के बाद उन्होंने कहा कि ' उन्हें इस फ़ैसले की संभावना लग रही थी और क़ानूनी रुप से वो लड़ाई जारी रखेंगी.'

इस दौरान डीएमके के 11 से ज़्यादा सदस्य भी कनिमोड़ी के साथ कोर्ट में मौजूद थे.

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अपने आदेश में सीबीआई की विशेष अदालत ने 144 पन्नों के अपने फ़ैसले में कहा, ''यह देखते हुए कि यह अपराध अपनी प्रकृति में कितना व्यापक है, इसके आरोप कितने गंभीर हैं और इस मामले में गवाहों पर दबाव बनाए जाने का आशंका है, मुझे यह फ़ैसला देने में कोई संदेह नहीं कि ज़मानत की दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं. कनिमोड़ी और कलैंग्नार टीवी के निदेशक शरद कुमार दोनों को हिरासत में ले लिया जाए.''

'आपराधिक षड्यंत्र'

कनिमोड़ी पर पैसे की ग़ैर क़ानूनी लेन-देन का आरोप है और चार्जशीट में उन पर ये भी आरोप लगाया गया है कि ए राजा के साथ मिलकर उन्होंने कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाने के ऐवज़ में वित्तीय लाभ उठाया.

बीते शनिवार को इस बारे में अदालत को फ़ैसला सुनाना था लेकिन अदालत ने कोई ख़ास कारण बताए बिना सुनवाई टाल दी थी.

सीबीआई ने विशेष अदालत के सामने कनिमोड़ी, कलैंग्नार टीवी के निदेशक शरद कुमार, सिनेयुग के निदेशक करीम मोरानी, राजीव अग्रवाल और आसिफ़ बलवा के ख़िलाफ़ पूरक आरोप-पत्र दाख़िल किया था.

आरोप-पत्र में सीबीआई ने कनिमोड़ी पर आपराधिक षड्यंत्र रचने का मामला दर्ज किया है.

सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में दावा किया है कि 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़े 200 करोड़ रुपए बलवा के ज़रिए कलैंग्नार टीवी तक पहुंचे और इसका ज़रिया बनीं कनीमोड़ी.

अदालत के इस फ़ैलसे पर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ''कनिमोड़ी पर फैसले से यह साबित हो गया है कि भ्रष्टाचार के सभी बड़े मामलों में जांच की निगरानी जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से नहीं होगी तक तक कुछ भी सामने आना संभव नहीं है.''

विवादों के घेरे में

राज्यसभा सांसद कनिमोड़ी लंबे समय से इस मामले को लेकर विवादों में हैं. उन पर गिरफ़्तारी की तलवार भी लटक रही थी.

2-जी स्पैक्ट्रम मामले में हुए घोटालों ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) की जैसे मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पहले केंद्र में दूरसंचार मंत्री ए राजा की गिरफ़्तारी तो अब पार्टी सांसद कनिमोड़ी की परेशानी.

दरअसल जब से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 2-जी स्पैक्ट्रम मामले की जाँच शुरू हुई है, कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा है.

पटियाला हाउस कोर्ट से आ रही ख़बरों के मुताबिक कनिमोड़ी लगातार कोर्ट परिसर में मौजूद थीं और इस फ़ैसले के बाद उन्होंने कहा कि 'उन्हें इस फ़ैसले की उम्मीद थी.'

द्रमुक के लिए परेशानी इसलिए भी है कि वह केंद्र की गठबंधन सरकार में शामिल है.

कनिमोड़ी पर पैसे के ग़ैर क़ानूनी लेन-देन का आरोप है और चार्जशीट में उन पर ये भी आरोप लगाया गया है कि ए राजा के साथ मिलकर उन्होंने कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाया और वित्तीय लाभ उठाया.

राजनीतिक सफ़र

पहले से ही कई सामाजिक कार्यों से जुड़ी कनिमोड़ी का राजनीतिक करियर उस समय चर्चा में आया जब वर्ष 2007 में वे राज्यसभा के लिए चुनीं गईं. तब से वे राज्यसभा सांसद हैं.

पिछले साल कई पत्र-पत्रिकाओं में लॉबिस्ट नीरा राडिया और कनिमोड़ी के बीच कथित बातचीत के टेप जारी हुए थे और दावा किया गया था कि केंद्र में ए राजा को एक बार फिर दूरसंचार मंत्री बनाने के लिए लॉबिंग की जा रही थी.

ए राजा वर्ष 2008 में 2-जी स्पैक्ट्रम आबंटन के समय भी दूरसंचार मंत्री थे. मनमोहन सिंह की दूसरी पारी में भी वे दूरसंचार मंत्री बने.

इन कथित टेप के बाद आए राजनीतिक भूचाल में कनिमोड़ी का नाम ख़ूब उछला. ए राजा के ख़िलाफ़ चार्जशीट और फिर गिरफ़्तारी के बाद ये लगने लगा था कि कनिमोड़ी का नाम भी इस मामले में आ सकता है.

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