एक और 'मोस्ट वांटेड' भारत में

केंद्रीय गृहमंत्रालय
Image caption अभी गृहमंत्रालय की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है

मुंबई के पड़ोसी ज़िले ठाणें में रह रहे वज़हुल क़मर ख़ान का नाम पाकिस्तान को दी गई 50 मोस्ट वांटेड की सूची में आने के बाद इसी तरह का एक और मामला आ गया है.

पता चला है कि मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद फ़िरोज़ अब्दुल रशीद ख़ान का नाम भी इसी सूची में है.

इस सूची के मुताबिक़ इन दोनों को पाकिस्तान में होना चाहिए था. लेकिन ये दोनों भारत में ही अदालती कार्यवाहियों में भी हिस्सा लेते रहे हैं.

इस दूसरे नाम के सामने आने के बाद सीबीआई ने अपनी ग़लती मानते हुए ‘तुरंत कार्रवाई करते हुए’ एक इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है और दो एसपी और डीएसपी रैंक के अफ़सरों का जाँच ख़त्म होने तक स्थानांतरित कर दिया है.

अभी केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गृहसचिवों की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को 50 मोस्ट वांटेड लोगों या भगोड़ों की एक सूची सौंपी थी.

गत 11 मई को इसे भारत में मीडिया को जारी किया गया था.

इसमें लश्कर के संस्थापक हाफ़िज़ सईद और दाऊद इब्राहिम सहित कई प्रमुख चरमपंथियों के नाम थे.

इसे पाकिस्तान पर भारत की ओर से दबाव बनाने की कोशिश के रुप में देखा गया था क्योंकि कहा गया था कि ये सभी पाकिस्तान में छिपे हुए हैं.

'जाँच में पता चला'

सीबीआई के एक वक्तव्य में कहा गया है कि 17 मई को पहली ग़लती पाए जाने का बाद इंटरपोल की सूची की समीक्षा की गई थी जिसमें पाया गया कि फ़िरोज़ अब्दुल रशीद ख़ान का नाम भी पाकिस्तान को दी गई मोस्ट वांटेड लोगों की सूची में था.

Image caption पी चिदंबरम ने एक दिन पहले ही एक व्यक्ति का नाम इस सूची में आने पर खेद जताया था

वक्तव्य के मुताबिक़ अब्दुल रशीद ख़ान की गिरफ़्तारी की जानकारी सीबीआई की इंटरपोल शाखा को दी गई थी लेकिन एक अफ़सर ने गलती से इंटरपोल को रेड कॉर्नर नोटिस को रद्द करने का निवेदन नहीं किया. साथ ही इस अफ़सर ने सीबीआई की इंटरपोल शाखा के रेकॉर्ड्स में भी सुधार या अपडेट नहीं किया.

सीबीआई के मुताबिक़ सीबीआई की इंटरपोल शाखा बाकी नामों की अच्छी तरह जाँच कर रही हैं और सीबीआई प्रमुख ने इंटरपोल शाखा के कामकाज की पूर्ण समीक्षा के लिए एक संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया है.

मुंबई में 1993 बम धमाकों में अभियुक्तों की वकील फ़रज़ाना शाह के मुताबिक़ 50 लोगों की मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल फ़िरोज़ अब्दुल रशीद ख़ान से उनकी मुलाक़ात पिछले 11 मई को हुई थी जब उन्हें अदालत में पेश किया गया था.

इस बारे में अभी महाराष्ट्र सरकार के किसी अधिकारी या मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

'शर्मिंदगी की बात'

फ़रज़ाना शाह ने बीबीसी से कहा कि वो फ़िरोज़ ख़ान का नाम मोस्ट वांटेड की सूची में आने से बेहद खफ़ा हैं और ये देश के लिए शर्मिंदगी की बात है.

फ़रज़ाना के मुताबिक़ फ़िरोज़ पर 1993 बम धमाके मामले में सामान की ढुलाई और उसे समुद्र के किनारे पर उतारने के आरोप हैं.

उन्हें पाँच फ़रवरी 2010 को नवी मुंबई से गिरफ़्तार किया गया था और बाद में सीबीआई के हवाले कर दिया गया था.

याद रहे कि बुधवार को ही गृहमंत्री पी चिदंबरम ने 50 मोस्ट वांटेड लोगों की सूची में वज़हुल ख़ान का नाम आने को गलती बताया था और कहा था कि "यह एक मानवीय भूल थी. ग़लती हुई है, हम किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे. हम इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं."

चिदंबरम ने कहा था कि सीबीआई को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी कि मुंबई पुलिस ने वज़हुल ख़ान को गिरफ़्तार किया था.

ख़बर का असर

मीडिया में ये ख़बरें आने पर कि 'मोस्ट वांटेड लिस्ट' में शामिल वज़हुल ख़ान मुंबई से लगे ज़िले ठाणे में परिवार के साथ रह रहे हैं, सीबीआई ने उनका नाम रेड कॉर्नर नोटिस की सूची से हटा लिया था और उनका प्रोफ़ाईल भी अपनी वेबसाईट से हटा लिया था.

उधर भारत में ही मौजूद एक और व्यक्ति का नाम 'मोस्ट वांटेड लिस्ट'में आने के बाद वज़हुल कमर ख़ान से जब बीबीसी ने संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि ये एक और इंसानी ग़लती हो सकती है.

उन्होंने कहा कि उनकी कहानी के मीडिया में छपने से उनकी ज़िंदगी और कामकाम प्रतिकूल असर पड़ना शुरू हो गया है और उन्हें काम मिलने बंद हो गए हैं, यहाँ तक कि वो अपना घर बदलने के लिए भी सोच रहे हैं.

वज़हुल ने कहा, "मीडिया के एक हिस्से में मेरी पत्नी और बच्चों की तस्वीरें छाप दी गईं जिनसे उनके स्कूलों में उन्हें परेशानी हो सकती है और लोग कह सकते हैं कि इसके पिता पर संगीन इल्ज़ाम हैं. मेरे पिछले आठ साल बेहद मुश्किल के रहे हैं. किसी पर इस तरह से देशद्रोह का इल्ज़ाम लगाना बहुत ग़लत है. अगर मैं देशद्रोही हूँ तो आप मुझे फांसी पर लटका दीजिए, लेकिन ये सब इल्ज़ाम ग़लत हैं."

वज़हुल ने कहा कि इस पूरे वाकये पर उनके समुदाय में लोग कह रहे हैं कि मुसलमानों के साथ सरकार ग़लत कर रही है.

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