सूची पर बवाल से परेशान हैं वज़हुल

केंद्रीय गृहमंत्रालय
Image caption इस मामले को लेकर सीबीआई सहित गृहमंत्रालय की काफ़ी किरकिरी हुई है.

जबसे मीडिया में यह बात उछली है कि भारत में मौजूद वज़हुल क़मर ख़ान का नाम ग़लती से पाकिस्तान को दी हुई मोस्ट वांटेड सूची में शामिल है, तबसे वो अपने परिवार पर पड़ने वाले असर को लेकर परेशान हैं.

आसपास के सभी लोगों को उनके बारे में पता लग गया है, जिससे वो खुश नहीं है.

वज़हुल अपना ठाणे का घर छोड़कर किसी दूसरे इलाक़े में सस्ते किराए के मक़ान की तलाश कर रहे हैं. मीडिया में परिवार के सदस्यों की तस्वीरें छपने से भी वो परेशान हैं क्योंकि बच्चों के स्कूल कुछ ही दिनों में खुलने वाले हैं.

उन्होंने अपना ज़री का कारोबार छोड़ दिया है, लेकिन वो नए काम के बारे में नहीं बताते क्योंकि उन्हें डर है कि मीडिया में बात फ़ैलने से उनके काम पर असर पड़ सकता है.

वज़हुल के ऊपर 2002 मुंबई बम धमाकों का षड्यंत्र रचने के केस के अलावा ‘आर्म्स एक्ट’ का केस भी चल रहा है.

वज़हुल यह भी कहते हैं कि एक बार जब सरकार ने माफ़ी मांग ली है तो अब कोई दबाव डालना अच्छा नहीं है.

'ग़लती'

लेकिन बीबीसी से बात करते हुए वज़हुल ने बताया कि वो सबसे ज़्यादा वर्ष 2000 के उस दिन के बारे में सोचकर परेशान हो जाते हैं जब वो एक दोस्त के कहने पर भिवंडी के पड़गा इलाक़े के किसी पहाड़ी इलाक़े में गए. उन्हें दावत के नाम पर बुलाया गया था.

वज़हुल बताते हैं, ''मेरी ग़लती थी कि मैं वहाँ गया और मैं वहाँ मौजूद था. मैं बिना बात के फंस गया. मैने वहाँ स्वचालित हथियार देखे. उनकी संख्या शायद एक या दो होगी. वहाँ क़रीब 10-12 लोग थे. हथियारों को देखकर मुझे घबराहट हुई. उसके बाद मैने उऩ लोगों से कभी कोई ताल्लुक़ नहीं रखे. जब धमाकों के बाद हथियार पकड़े गए तो फिर एक चेन बननी शुरू हो गई, कि कौन-कौन उस जगह पर आया था. उसी कड़ी में मेरा नाम भी आ गया.''

वो एक अख़बार में छपी इस ख़बर को बकवास बताते हैं कि उन्होंने एक-47 राईफ़ल को हाथ में लिया था.

वज़हुल कहते हैं कि उनका ताल्लुक़ बम धमाकों से बताया गया लेकिन उससे उनका कोई ताल्लुक़ भी नहीं था और जिन लोगों से उनकी मुलाक़ात हुई उन्होंने उन्हें कभी देश के ख़िलाफ़ किसी कार्रवाई के बारे में नहीं कहा.

गिरफ़्तारी

वज़हुल के मुताबिक़ वर्ष 2002 में जब उन्होंने धमाकों के सिलसिले में टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ में अपना नाम देखा तो वो अपने गाँव में रिश्तेदारों के पास भाग गए. क़रीब एक साल बाद, वर्ष 2003 में वो ‘परिवार की ख़ातिर’ मुंबई वापस आए.

वो कहते हैं, '' मैंने सोचा कि जब तक मैं पकड़ा जाता हूँ, तब तक तो मैं अपने परिवार के लिए कुछ कर लूँ. तो मैंने एक छोटा सा ज़री का कारोबार शुरू किया और परिवार को पालना शुरू कर दिया. पिछले साल मैं पकड़ा गया लेकिन बाद में ज़मानत पर छूट गया.''

लेकिन वापस मुंबई आने के बाद वो परिवार के साथ नहीं रहे. परिवार में किसी को नहीं पता था कि वो कहाँ जाते हैं, कहाँ रहते हैं और क्या करते हैं. उन्होंने धारावी में ज़री का छोटा कारोबार शुरू किया जिससे बीस से पच्चीस हज़ार महीने की कमाई हो जाती थी.

वज़हुल के मुताबिक़ इस दौरान उन्होंने आसपास के लोगों से झूठ बोला और कहा कि मामला सुलझ गया है.

वज़हुल बताते हैं कि वो घर रात दो बजे के आसपास आते थे और सुबह चार बजे तक निकल जाते थे. उनके अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि सभी लोग बरी हो जाएंगे क्योंकि केस झूठा था.

'' मुझे लगा कि मेरी ज़िंदगी ख़राब हो गई है और इतना बड़ा इल्ज़ाम लगने के बाद अब ये व्यवस्थित नहीं हो पाएगी. तब मैं अपनी ज़िम्मेदारी निभाया करता था. उन्हें पैसा पहुंचाया करता था, अपनी जायदाद बेचकर या कारोबार करके उऩ्हें पैसा पहुँचाया करता था. घर में सभी डरे हुए रहते थे, लेकिन कर क्या सकते थे. हम लाचार थे. ''

वज़हुल के मुताबिक़ उन्हें अभी तक नहीं पता कि किस ख़बरी ने उनके मुंबई में रहने की ख़बर को पुलिस को दी.

लेकिन ज़मानत मिलने के बाद वो इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफ़सरों से मिलते रहे, विशेष अदालत और मज़गाँव अदालत भी जाते रहे. वो कहते हैं कि सुरक्षा एजेंसियाँ उनके बारे में सब जानती हैं और वो कभी पाकिस्तान नहीं गए.

परिवार

दसवीं तक पढ़े वज़हुल का परिवार उत्तर प्रदेश का है, लेकिन उनकी पैदाईश, पढ़ाई-लिखाई मुंबई में ही हुई.

उनके पिता को दिल की बीमारी थी. 12 साल पहले परिवार कुर्ला से ठाणे आ गया. उनके पिता का पाईप का कारोबार था.

वज़हुल कहते हैं कि हालांकि उनके समुदाय में कुछ लोग कह रहे हैं कि मुसलमानों के साथ ज़्यादती हो रही है, वो कहते हैं कि उन्हें ऐसा नहीं लगता क्योंकि दूसरी कौमौं के लोगों को भी पुलिस पकड़ रही है.

वो अपने दो बेटों को आईएएस अधिकारी और तीन लड़कियों को डॉक्टर बनाना चाहते हैं.

वो कहते हैं कि उन्हें विश्वास है कि उनके ख़िलाफ़ सभी केस रद्द हो जाएंगें क्योंकि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है. फ़िलहाल अभी उनकी चिंता ज़िंदगी की गाड़ी को दोबारा पटरी पर लाने को लेकर है.

संबंधित समाचार