'छत्तीसगढ़ में एक पुलिस दल लापता'

छत्तीसगढ़ पुलिस(फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल लगातार माओवादियों के शिकार बनते रहें हैं.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में निकले पुलिस के एक छापामार दल का पिछले कई घंटों से कोई सुराग़ नहीं है.

यह दल गरियाबंद इलाक़े के जंगलों में गश्त पर निकला हुआ था.

ऐसी खबरें हैं कि घने जंगलों की इस श्रंखला में आमामोरा के पास यह दल नक्सलियों के बिछाए हुए एक एम्बुश में फँस गया है.

यह भी ख़बर है कि घटना स्थल से विस्फोट और गोलियां चलने की आवाज़े सुनाई दी हैं.

गरियाबंद पुलिस ज़िले के अधीक्षक कमल लोचन कश्यप का कहना है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश पवार के नेतृत्व में दस पुलिसकर्मियों का दल सोमवार सुबह ही सोनाबेदा के लिए रवाना हुआ था.

लेकिन सोमवार देर रात तक इस दल के बारे में कोई ख़बर नहीं है.

ज़िला मुख्यालय से वायरलेस के ज़रिए इस दल से संपर्क करने की कोशिश भी नाकाम रही है.

'आशंका'

स्थानीय पत्रकारों और सूत्रों के हवाले से ख़बर मिल रही है कि यह दल अपने वाहन में गश्त पर गया था.

मगर ऐसी ख़बरें हैं कि इनका वाहन ख़राब हो गया था और यह सभी लोग ट्रैक्टर पर सवार होकर लौट रहे थे.

इसी बीच आमामोरा के पास घात लगाकर बैठे नक्सलियों से इनकी मुठभेड़ होने की भी ख़बर है.

यह इलाक़ा उड़ीसा की सीमा से लगा हुआ बताया जाता है जो घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है.

ऐसी ख़बरें थीं की माओवादियों नें इस इलाक़े में अपना बड़ा बेस कैंप बना रखा है.

कहा जा रहा है कि इस इलाक़े के एक बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगों का जाल बिछा हुआ है.

ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि सिर्फ़ दस जवान इस ख़तरनाक माने जाने वाले इलाक़े में गश्त करने क्यों गए थे जबकि नक्सली अभियान के तहत इन इलाक़ो में बिना प्रयाप्त बलों के नहीं जाया जाता है.

पुलिस के आला अधिकारी अभी इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते क्योंकि उनके अनुसार रात के वक़्त उस इलाक़े में जाया नहीं जा सकता.

अब अधिकारियों को सुबह होने का इंतज़ार है और वह मंगलवार की सुबह में ही इस बारे में कुछ कर सकते हैं.

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