यूपी में एक और ज़मीन घोटाले का आरोप

भट्टा परसौल(फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption कुछ ही दिनों पहले ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल में ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई जिसमें चार लोग मारे गए थे.

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार पर दिल्ली से सटे नोएडा में पांच हज़ार करोड़ रूपए के एक और ज़मीन घोटाले का आरोप लगाया है.

भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री किरीट सोमैया ने मंगलवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर आरोप लगाया कि मायावती सरकार ने नोएडा में किसानों की ज़मीनें जनहित के लिए औद्योगिक विकास के नाम पर सस्ते दामों पर जबरन ले लीं और फिर उन्हें अपने चहेते लोगों को फ़ार्म हाउस के नाम पर आबंटित कर दिया.

भारतीय जनता पार्टी ने इसे नोएडा फ़ार्म हाउस घोटाला नाम दिया है.

'फ़ार्म हाउस घोटाला'

किरीट सोमैया के अनुसार मायावती सरकार ने सन् 2009 में गौतमबुद्धनगर में नोएडा योजना के अंतर्गत औद्योगिक विकास के नाम पर दादरी तहसील के दोस्तपुर मंगरौली गाँव में किसानों की 130 हेक्टर ज़मीन का अधिग्रहण किया.

सरकार ने भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही जनहित के नाम पर तात्कालिक ज़रूरत बताकर कर ली.

सौमैया के अनुसार ज़मीन का बाज़ार मूल्य लगभग 15 हज़ार रुपए वर्ग मीटर है जबकि किसानों को केवल 888 रूपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवज़ा दिया गया.

सोमैया ने आरोप लगाया कि माया सरकार ने कुछ दिन बाद इन ज़मीनों पर बने फ़ार्म हाउस को अज्ञात अस्तित्वहीन कंपनियों को स्थानांतरित कर दिया.

सोमैया ने सवाल किया, ''खेती करने वाले किसानों से ज़मीन छीनकर पैसे वालों को फ़ार्म हाउस के लिए देना कैसा औद्योगिक विकास है?’’

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Image caption भारत में किसान सरकार की ज़मीन अधिग्रहण नीति का विरोध करते रहे हैं.

सोमैया के मुताबिक़ जिन लोगों को ज़मीनें दी गई उनमे लखनऊ निवासी शांति सिंह और तीन निजी कम्पनियाँ मेसर्स सुपीरियर पोर्टफोलियो, मेसर्स ग्रेट वैल्यू बिल्डर्स तथा मेसर्स कुणाल इन्फ्राटेक शामिल हैं.

सोमैया का कहना है कि उन्होंने सूचना अधिकार नियम के तहत आबंटियों की पूरी जानकारी मांगी है.

सोमैया ने पत्रकारों को भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय के एक पत्र की फ़ोटोकापी भी दी, जिससे पता चलता है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ मनी लांड्रिंग क़ानून के तहत जांच शुरू की है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई सहयोग नही दिया.

जांच

सोमैया ने बताया कि उनकी पार्टी इस घोटाले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से चाहती है. इसके लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की जायेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक इन आरोपों का जवाब नही दिया है.

सोमैया ने बताया कि भाजपा इस मामले में किसानों को भी संगठित करेगी और संघर्ष के ज़रिए उनकी ज़मीन वापस दिलाएगी.

भाजपा ने एक महीने के अदंर मायावती सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का यह तीसरा आरोप पत्र जारी किया है.

उत्तर प्रदेश भाजपा ने इससे पहले मायावती सरकार के सौ घोटालों की रिपोर्ट जारी कर दो लाख चौवन हज़ार करोड़ रुपयों की लूट का आरोप लगाया था.

उसके बाद दूसरे आरोप पत्र में सरकारी चीनी मिलें सस्ती दरों पर बेंचने में भी घोटाले का आरोप लगाया था.

मायावती सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.

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