ठंडक और गर्मी पैदा करने वाली जैकेट

क्रांति किरण

हैदराबाद के एक युवा इंजीनियर ने एक आश्चर्यजनक जैकेट का अविष्कार किया है जो गर्मी में ठंडी रह सकती है और सर्दियों में गर्म.

अमरीका की मैसेच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से शिक्षा लेने वाले क्रांति किरण वित्स्कुला ने इस आधुनिक और नवीनतम जैकेट का अविष्कार किया है.

इस नई तकनीक के आधार पर जैकेट के अलावा जूते, मफ़लर और कई वस्तुएं बनाई गईं है जो इंसान को मौसम की मार से बचा सकती हैं.

इस आधुनिक जैकेट को लगभग पांच वर्षों के शोध के बाद तैयार किया जा सका है.

इसकी सफलता का अंदाज़ा इस बात से लगता है कि भारतीय सेना ने इस जैकेट को सियाचीन में सफलता के साथ आज़माया है.

संभावना है कि भारतीय सेना इस जैकेट का प्रयोग उन इलाकों में और ज़्यादा करेगी जहाँ ख़राब मौसम के बीच सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं.

जैकेट को ईजाद करने वाले क्रांति किरण इसके प्रयोग के लिए ख़ुद सियाचीन गए थे और उन्होंने पाया कि उस सर्दी में भी इस जैकेट ने उन्हें गर्म रखा.

पेल्टियर इफेक्ट

पूछे जाने पर कि गर्म और ठंडी रहने वाली इस जैकेट का क्या राज़ है क्रांति किरण ने बताया, "इसकी प्राथमिक तकनीक पेल्टियर इफेक्ट है जो कि डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है. हमने नया काम ये किया है कि किस तरह से उत्पन्न होने वाली गर्मी को बाहर निकाला जाए और बिजली के प्रभाव से किस तरह एक ओर ठंडक और दूसरी ओर गर्मी का उत्पादन किया जाए."

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Image caption जैकेट का कई तरह से परीक्षण किया गया

क्रांति किरण कहते हैं कि उन्होंने इस जैकेट में कई पेल्टियर प्लेट्स का इस्तमाल किया जिन्हें प्लास्टिक टाइल्स में रखा जाता है और रिचार्ज होने वाली बैटरी से जोड़ा जा सकता है.

ऐसी बैटरी दो घंटे से लेकर आठ घंटे तक काम कर सकती है और इन्हें बिजली से, सौर ऊर्जा से या फिर मोटर गाड़ी से रीचार्ज किया जा सकता है.

क्रांति किरण ने बताया कि ज़्यादा क्षमता वाली जैकेट कि क़ीमत 40,000 रुपये और कम क्षमता वाली की क़ीमत 18,000 रूपये तक रहेगी.

साथ ही उन्होंने ये भी जानकारी दी कि उनकी कंपनी सेनाओं के अलावा औद्योगिक कर्मियों और आम लोगों के लिए भी ऐसी जैकेट तैयार कर रही है.

भारतीय सेना के अलावा अमरीकी सेना ने भी इस जैकेट का परीक्षण किया है.

क्रांति किरण बताते हैं, "अमरीकी अधिकारियों ने कुछ और सुझाव दिए हैं. इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए इनमे कुछ बदलाव लाया जा रहा है."

जूते और मफ़लर

जैकेट के अलावा इस कंपनी ने ऐसे जूते और मफ़लर भी तैयार किए हैं जो भीषण मौसम में शरीर की रक्षा कर सकें.

इसी कड़ी में एक स्कार्फ़ भी शामिल है जिसे गर्दन पर लगाने पर उसका तापमान 18 डिग्री तक रखा जा सकता है.

इस स्कार्फ़ की बिक्री शुरू हो चुकी है और इसकी कीमत 6,000 रुपए है.

किरण के अनुसार ये एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी क्षेत्र के अलावा भी किया जा सकता है.

उनकी कंपनी ने ऐसी पट्टियाँ भी बनाई हैं जिन्हें बाँधने से रोगियों का दर्द कम किया जा सके.

इन पट्टियों का तापमान कुछ ही सेकंडों में शून्य से लेकर 50 डिग्री तक पहुँच सकता है.

क्रांति किरण की कंपनी 'हीमो सेवर' नाम के एक और उपकरण पर काम कर रही है.

ये एक ऐसी ख़ास पट्टी है जिससे घाव होने या फिर गोली लगने के बाद मरीज़ के खून का बहाव रोका जा सकता है.

क्रांति किरण कहते हैं, "मुझे बचपन से ही आराम पसंद था और मैं चाहता था कि गर्मी या सर्दी से मुझे तकलीफ़ न हो. मैं हैदराबाद का हूँ जहाँ बहुत गर्मी होती है पर जब में अमरीका गया तो वहाँ सर्दी भीषण थी. तभी से मैंने ऐसी तकनीक पर काम शुरू कर दिया."

क्रांति का सपना है कि भारत तकनीक के मामले में दूसरे सभी देशों से आगे रहे.

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