'आतंकवाद पाक की राष्ट्रीय नीति का हथियार'

पी चिदंबरम  और जेनेट नेपोलिटैनो इमेज कॉपीरइट BBC World Service

भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि पाकिस्तान में 'आतंकवाद का बुनियादी ढाँचा लंबे समय से राष्ट्रीय नीति के हथियार के रूप में फल-फूल रहा है'.

अमरीकी गृहमंत्री जैनेट नैपोलिटैनो के साथ दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता शुरु करने से पहले अपने संबोधन में पी चिदंबरम ने कहा, "ये कहना बिल्कुल उचित है कि भारत संभवतया दुनिया में सबसे अधिक मुश्किल पड़ोस में रह रहा है और वैश्विक आतंकवाद का केंद्र हमारे बिल्कुल पश्चिमी देश में है."

दोनों मंत्रियों की वार्ता के बाद मीडिया से हुई बातचीत में जेनेट नैपोलिटैनो ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अमरीका पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा को अल-क़ायदा और उससे जुड़े संगठनों जैसा ही ख़तरनाक मानता है.

अमरीकी मंत्री से पाकिस्तान पर पी चिंदबरम के बयान पर प्रतिक्रिया माँगी गई तो वे इस सवाल से बचती हुई नज़र आईं. मुंबई हमलों में आईएसआई के हाथ होने के सवाल को भी वे टाल गईं.

उन्होंने कहा, “मैं यहाँ यहाँ भारत-अमरीका संबंधों के बारे में बात करने आई हूँ. जहाँ तक आईएसआई की भूमिका की बात है तो हेडली मामले की सुनवाई शिकागो में चल रही है. भारत से कई जानकारियाँ साझा की गई हैं. मामला कोर्ट में हैं. इस पर ज़्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा.”

वार्ता के अंत में दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि इस वार्ता में इस बात पर सहमति बनी है दोनों देश चरमपंथ को लेकर ख़ुफ़िया सूचनाओं, फ़ोरेंसिक और जाँच और ढाँचागत सुरक्षा के क्षेत्रों में एक दूसरे से सूचनाओं का और अधिक आदान प्रदान करें.

'कट्टर हो रहा है पाकिस्तानी समाज'

वार्ता शुरु करने से पहले के अपने संबोधन में गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि भारत के लोगों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि पड़ोस में एक स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध देश हो.

उन्होंने कहा, "आज पाकिस्‍तान में विभिन्‍न आतंकवादी समूह सुरक्षित पनाह लिए हुए हैं और उनकी संख्‍या बढ़ती जा रही है, पाकिस्‍तान समाज और भी कट्टर बन गया है."

भारत के गृहमंत्री ने कहा, "पाकिस्तान की अर्थव्‍यवस्‍था कमज़ोर हो चुकी है और पाकिस्‍तान में राष्‍ट्रीय ढांचा चरमरा गया है. आज पाकिस्‍तान खुद भी उन्‍हीं ताकतों के बड़े खतरे का सामना कर रहा है. उसकी जनता के साथ-साथ राष्‍ट्रीय संस्‍थाओं पर भी हमले हो रहे हैं."

चिदंबरम ने कहा कि चरमपंथ दोनों देशों के लिए प्राथमिक चुनौती है लेकिन दोनों ही देशों को कई और समस्याओं से निपटना है जिसमें नकली नोट, नशीली दवाओं की तस्करी और साइबर स्पेस के ख़तरे शामिल हैं.

उन्होंने मुंबई हमलों की जाँच के सिलसिले में अमरीका से मिले सहयोग की सराहना भी की.

चिदंबरम के साथ हुई पत्रकारवार्ता में हाफ़िज़ सईद के बारे में भी अमरीकी मंत्री से सवाल पूछा गया. जिस पर उन्होंने कहा कि अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पाकिस्तान में हैं और बेहतर होगा कि वे ही इसी बात का जवाव दें.

एक और सवाल के जवाब में जेनेट नैपोलिटैनो ने कहा है कि मुंबई हमलों की अमरीका में चल रही सुनवाई के बाद अमरीका भारत को डेविड से पूछताछ का और मौक़ा देने पर विचार कर सकता है.

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