काले धन की तादाद, हवाला और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकारी अध्ययन

भारत का रुपया

तीन राष्ट्रीय संस्थान भारत सरकार के आदेश पर देश में और विदेशों में भारतीयों के काले धन की तादाद का अनुमान लगाने का काम कर रहे हैं.

ये संस्थान न केवल अर्थव्यवस्था में कुल काले धन का अनुमान लगाएँगे बल्कि ये किन गतिविधियों से बनाया जा रहा है, हवाला का पैसा और इसका राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर, अर्थव्यवस्था के वो क्षेत्र जहाँ ये व्याप्त है और इसका पता लगाने और रोकथाम के तरीकों पर भी सुझाव देगी.

ये संस्थान ये भी सुझाएँगे कि इस पैसे पर भारत सरकार कर कैसे वसूल सकती है और अब तक इस संदर्भ में कितने कर का नुक़सान हुआ है.

जिन तीन संस्थानों को ये काम सौंपा गया है, वे हैं - राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त और नीति संस्थान, राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान और राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषद.

'काला धन 500 से 1400 अरब डॉलर'

वित्त मंत्रालय ने अपने एक बयान में माना है कि काले धन के बारे में कोई संतोषजनक अनुमान नहीं हैं. कुछ हलकों में ये अनुमान लगाया जाता है कि काले धन की तादाद 500 अरब डॉलर से लेकर 1400 अरब डॉलर तक हो सकती है.

ग्लोबल फ़ाइनेंश्यल इंटेग्रिटी संस्था ने अनुमान लगाया है कि अवैध तरीके भारत से बाहर जाने वाला पैसा 462 अरब डॉलर तक हो सकता है.

लेकिन इन अनुमानों की पुष्टि कर पाना बहुत मुश्किल है.

इस विषय पर ये संस्थाएँ इस साल मार्च में ही अध्ययन शुरु कर चुकी हैं और डेढ़ साल के भीतर इन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक समिति पहले ही बनाई जा चुकी है जो काला धन के इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए क़ानूनों को मज़बूत बनाने के लिए सिफ़ारिश करेगी.

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