बिनायक के सहयोगी गुहा को ज़मानत

बिनायक सेन (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पीयुष गुहा को सेन के साथ उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने पीयुष गुहा को मंगलवार को ज़मानत दे दी है. छत्तीसगढ़ की सरकार ने पीयुष गुहा को देशद्रोह के मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन के साथ गिरफ़्तार किया गया था और फिर छत्तीसगढ़ की निनचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और सीके प्रसाद की एक अवकाश पीठ ने गुहा को सुनाई गई उम्र क़ैद की सज़ा निलंबित कर दी और उन्हें ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया.

अवकाश पीठ ने पीयुष गुहा को दो लाख रूपए की ज़मानत और एक-एक लाख रुपए के दो मुचलके भरने का आदेश भी दिया.

उम्र क़ैद

कोलकाता के उद्योगपति गुहा को बिनायक सेन तथा नक्सली विचारधारा के समर्थक नारायण सान्याल के साथ देश के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए एक नेटवर्क स्थापित करने की ख़ातिर नक्सलियों के साथ सांठगांठ करने का दोषी ठहराया गया था.

छत्तीसगढ़ की निचली अदालत ने इन लोगों को दिसंबर 2010 में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

रायपुर में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीपी वर्मा ने बिनायक सेन, नारायण सान्याल और पीयूष गुहा तीनों को भारतीय दंड विधान की धारा 124 (देशद्रोह) और 120 बी (षडयंत्र) और छत्तीसगढ़ के जनसुरक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

निचली अदालत के फैसले को गुहा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन इस मामले में गुहा को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल सकी थी. बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

बिनायक सेन को भी निचली अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी और उन्हें भी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल सकी थी. बाद में उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट से ही आख़िरकार ज़मानत मिलि थी.

बिनायक सेन आज कल ज़मानत पर रिहा हैं.

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