'गृहमंत्री और राज्यपाल पर भी मामला चले'

Image caption पुलिस का दावा था कि आज़ाद और उनके साथी को मुठभेड़ में मारा गया

वरिष्ठ क्रांतिकारी कवि वरवर राव ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो से मांग की है कि वो वरिष्ठ माओवादी नेता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ़ आज़ाद और एक पत्रकार हेमचंद्र पांडेय की हत्या के मामले में राज्यपाल इ एस एल नरसिम्हन और कई अन्य व्यक्तियों के नाम भी अभियुक्तों की सूची में शामिल करे.

सुप्रीमे कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने आदिलाबाद ज़िले के ऐसे कुछ पुलिस अधिकारियों पर हत्या और आपराधिक षडयंत्र के मामले दर्ज किए हैं जो एक जुलाई 2009 को आज़ाद और पांडेय के मारे जाने की कार्रवाई में शामिल थे.

हत्या और षडयंत्र के मामले दर्ज करने का स्वागत करते हुए वरवर राव ने कहा कि केवल आदिलाबाद ज़िले के कुछ पुलिसकर्मियों को इसमें शामिल करना काफ़ी नहीं है.

उन्होंने कहा कि इसमें विशेष सुरक्षाबल ग्रेहाउंड्स, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ाद को एक जुलाई 2009 को नागपुर में गिरफ़्तार किया गया था और इसमें इन सभी संगठनों के लोग शामिल थे.

पुलिस ने दावा किया था कि आज़ाद और उनके एक साथी को आदिलाबाद ज़िले के जोगपुर जंगल में पुलिस के साथ भिड़ंत के दौरान मार डाला गया था.

लेकिन उनके परिवारवालों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन दोनों को पकड़ने के बाद उन्हें एक फर्ज़ी झड़प में मार डाला गया.

माँग

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने यही शिकायत सुप्रीम कोर्ट से की थी और उसपर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वो हत्या और षडयंत्र का मामला दर्ज कर छानबीन करे.

वरवर राव ने कहा कि स्वामी अग्निवेश ने सुप्रीमे कोर्ट से कहा था कि आज़ाद उस समय उनका एक ऐसा पत्र ले कर जा रहे थे जिसका संबंध माओवादियों और सरकार के बीच शांति वार्ता करवाने के प्रयासों से था.

उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने ये माँग की है कि केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम का नाम भी षडयंत्र के मामले में शामिल किया जाए.

वरवर राव ने माँग की कि इस मामले के अभियुक्तों की सूची में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल इ एस एल नरसिम्हन, गृह मंत्री साबित इन्द्र रेड्डी, पुलिस महानिदेशक अरविंद राव और आदिलाबाद ज़िला पुलिस के प्रमुख के नाम भी शामिल किए जाएँ क्योंकि इन सब लोगों ने कहा था कि यह पुलिस भिड़ंत असली थी.

उन्होंने कहा कि इन लोगों ने ग़लत बयान देकर जाँच प्रक्रिया पर प्रभाव डालने की कोशिश की.

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