दूरसंचार घोटाले में अब मारन पर आरोप

दयानिधि मारन
Image caption दयानिधि मारन ने तमाम आरोपों से इंकार किया है

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के बाद अब डीएमके के दूसरे नेता और राजा के पूर्ववर्ती दयानिधि मारन अब टेलीकॉम घोटाले में फँसते नज़र आ रहे हैं.

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मारन के दूरसंचार मंत्रित्व काल की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

इसी संस्था की याचिका टू जी घोटाले की जाँच को शुरू कराने की दिशा में एक महत्वपूर्व कदम साबित हुई थी.

दयानिधि मारन मनमोहन सिंह की वर्तमान सरकार में कपड़ा मंत्री हैं.

अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप

इस नई याचिका का आधार हाल ही में तहलका पत्रिका में छपी एक ख़बर है जिसमे कहा गया है कि मारन ने केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री रहते हुए नवंबर 2006 में एयरसेल कंपनी को 14 टेलीकॉम सर्कलों में मोबाइल सेवा शुरू करने के लाईसेंस गलत ढंग से दिए.

इसी पत्रिका का दावा है कि बदले में एयरसेल को चलने वाली मैक्सिस कंपनी ने मारन परिवार के स्वामित्व वाले सन समूह में दिसंबर 2007 से लेकर दिसंबर 2009 के बीच में 599 .01 करोड़ रुपए का निवेश किया.

इसके अलावा मैक्सिस समूह के ही एक अन्य अंग साउथ एशिया मल्टीमीडिया टेक्नोलौजीज़ लिमिटेड ने मारन परिवार की एक दूसरी कंपनी साउथ एशिया एफ़ एम लिमिटेड में 11 .28 करोड़ रुपयों का निवेश किया.

मारन की साउथ एशिया एफ़ एम लिमिटेड के पास भारत में 23 शहरों में एफ़ एम स्टेशन चलाने की अनुमति है.

बुधवार को एक बयान जारी कर केन्द्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन ने कहा " मेरे दूरसंचार मंत्री रहते हुए किसी टेलीकॉम कंपनी ने मेरे भाई की किसी भी कम्पनी में सीधे या परोक्ष रूप से निवेश नहीं किया."

मारन के इस्तीफ़े की मांग

इस बीच तमिलनाडु में डीएमके को हाल ही के चुनाव में हरा कर राज्य में मुख्यमंत्री बनीं जे जयललिता ने तत्काल दयानिधि मारन के इस्तीफ़े की मांग की है.

Image caption कई विपक्षी दलों ने कहा है कि प्रधानमंत्री को मारन से तत्काल इस्तीफ़ा ले लेना चाहिए

जयललिता ने एक बयान में कहा " मुझे भरोसा है कि प्रधानमंत्री को पता है कि क्या किया जाना चाहिए. अगर प्रधानमंत्री ने अब तक उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कहा तो उन्हें तत्काल ऐसा करना चाहिए."

इसी तरह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ( सीपीआईएम) के महासचिव प्रकाश करात ने मारन के मंत्रित्व काल में दिए गए लईसेंसों की "गंभीर जांच" की मांग की है. करात ने चेन्नई में जयललिता से मुलाक़ात के बाद कहा " मुझे उम्मीद है की प्रधानमंत्री और केन्द्रीय सरकार जल्द से जल्द इस मामले की जांच करायेंगे." उधर दूसरी तरफ नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि मारन ने मंत्री रहते हुए मोबाइल सेवाओं में विदेशी निवेश की सीमा 26 से 74 प्रतिशत कर दी थी. भारतीय जनता पार्टी ने भी मारन के इस्तीफ़े की मांग की है.

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